अभिनेता मोहनलाल को दादा साहब फाल्के सम्मान, शाहरुख, रानी मुखर्जी सर्वश्रेष्ठ अदा के लिए सम्मानित

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नयी दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय सिनेमा में अमूल्य योगदान के लिए अभिनेता, निर्देशक मशहूर मलियाली कलाकार मोहनलाल को सर्वोच्च फिल्म पुरस्कार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया है।मशहूर अभिनेता शाहरुख खान को उनकी फिल्म जवान के लिए तथा विक्रांत मैसी मैसी को 12वीं फेल के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान दिया गया जबकि रानी मुखर्जी को मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे में उनके दमदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया है।श्रीमती मुर्मु ने मंगलवार को यहां विज्ञान भवन में 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2023 के लिएआयोजित समारोह में हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयाल, असमिया, उड़िया, मराठी, पंजाबी, गुजराती, गारो सहित कई भाषाओं की फिल्मों को पुरस्कार दिया गया। भारतीय फिल्मों में दमदार अभिनय के लिए कुछ बाल कलाकारों को भी सम्मानित किया गया है। इन कलाकारों को राष्ट्रीय सम्मान दिये जाने की घोषणा होते ही पूरा विज्ञान भवन तालियों की गड़गडाहट से गूंज उठा और जैसे ही राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया काफी देर तक पूरा विज्ञान भविन गूंजता रहा।मशहूर मलयाली अभिनेता मोहनलाल लगातार पांच दशक से मलयाली फिल्मों में अपना अप्रितम योगदान दे रहे हैं। उन्होंने मलयाली फिल्म उद्योग को अपनी प्रतिभा से संवारा है और मलयाली फिल्मों में अपना असाधारण योगदान दिया है जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति ने आजीन उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित दादा साहब सम्मान दिया है। उन्होंने कई तमिल फिल्मों में भी काम किया है। इसके अलावा उन्होंने संस्कृत के नाटक कर्ण में अहम भूमिका निभाई और अपने अभिनय कला का जबरदस्त परिचय दिया।पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथा नौ बार केरल फिल्म पुरस्कार से सम्मनित पद्मभूष मोहनलाल ने अपने 50 साल के कैरियर में 360 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। उन्हें यह सम्मान उनके अद्भुत अभिनय और मलियाली में असंख्य कलाकारों को फिल्मों में अपना कैरियर आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका के लिए दिया गया है।पद्मभूषण मोहनलाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वह इस सम्मान को पाकर अत्यंत गौरवान्वित हुए हैं और अपने जीवन के इस गौरवमयी क्षण में वह इस समारोह को मलयाली फिल्म इंडस्ट्री को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म उनका जीवन और आत्मा है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन फिल्मों को समर्पित है और इस भव्य समारोह में दादा साहब फाल्के सम्मान देने के लिए वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आभार व्यक्त करते हैं।उन्होंने कहा कि सिनेमा में उनके सफ़र को जिन्होंने आकार दिया वह उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिन भी फ़िल्मों में काम किया, उन सभी ने उन्हें गहराई से छुआ और उन्हें एक माध्यम के रूप में सिनेमा की शक्ति की याद दिलाई। सम्मान को “जादुई और पवित्र” बताते हुए, उन्होंने इस पुरस्कार को मलयालम फ़िल्म उद्योग के दिग्गज कलाकारों को समर्पित किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि यह पूरी बिरादरी का है। उन्होंने कहा कि सिनेमा उनकी आत्मा की धड़कन है, और इस सम्मान ने इस कला को और गहराई और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने के उनके संकल्प को और मज़बूत किया है।समारोह का एक विशेष आकर्षण गारो लघु फिल्म रही जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है। गारो देश की राष्ट्रीय भाषाओं की अनुसूचि में शामिल नहीं है लेकिन गारो भाषा की लघु फिल्म की थीम ने ज्यूरी को बहुत प्रभावित किया और उसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।फिल्म ’12वीं फेल’ (हिन्दी) को ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’ के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्पल दत्ता को उनके महत्वपूर्ण और व्यापक आलोचनात्मक लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक (असमिया) का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया। नंदू पृथ्वी, फ़िल्म: हनु-मान (तेलुगु), विजयराघवन और मुथुपेट्टई सोमू भास्कर को क्रमशः पूक्कालम (मलयालम) और पार्किंग (तमिल) में उनके शानदार अभिनय के लिए सहायक अभिनेता के रूप में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।उर्वशी और जानकी बोडीवाला को क्रमशः उल्लोझुक्कु (मलयालम) और वाश (गुजराती) में उनके शानदार अभिनय के लिए सहायक अभिनेत्री के रूप में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मनीष सैनी द्वारा निर्देशित, ‘गिद्ध (द स्कैवेंजर)’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म (30 मिनट तक लंबी) का पुरस्कार मिला। मलयाली फिल्म ‘उल्लोझुक्कूको’ को सर्वश्रेष्ठ मलयालम फ़िल्म का सम्मान दिया गया जबकि ‘पुष्कर’ को सर्वश्रेष्ठ उड़िया फिल्म का पुरस्कार मिला। मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’को सर्वश्रेष्ठ मराठी फ़िल्म का सम्मान दिया गया तथा फिल्म “वश” को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फिल्म के सम्मान से नवाजा गया।सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार श्रेणी में मराठी फिल्म नाल-2 के लिए त्रिशा थोसर, श्रीनिवास पोकले और भार्गव जगताप को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाज़ा गया।

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