कैबिनेट का बड़ा फैसला: रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने वाली तीन परियोजनाओं को स्वीकृति

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नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुल 18,509 करोड़ रुपये की रेलवे की तीन नयी परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुंबई-हावड़ा लाइन पर कसारा-मनमाड़ के बीच, दिल्ली से अंबाला के बीच और बेल्लारी से होसपेट के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी। सूचना एवं प्रसारण और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि 131 किमी के कसारा-मनमाड़ सेक्शन पर तीसरी और चौथी का काम 10,154 करोड़ रुपये की लागत से पांच साल में पूरा किया जायेगा। यह काफी चुनौतीपूर्ण परियोजना है। इसमें 28 किमी की पांच सुरंगों का निर्माण किया जायेगा जिसमें सबसे लंबी सुरंग 24 किलोमीटर की होगी। इस सेक्शन में तीन महत्वपूर्ण पुल और 16 बड़े पुल बनाये जायेंगे। काम पूरा होने के बाद कसारा और इगतपुरी सेक्शन पर ट्रेन में चढ़ाई के लिए अतिरक्त इंजन लगाने की जरूरत समाप्त हो जायेगी। इससे हर साल माल ढुलाई 4.61 करोड़ टन बढ़ जायेगी। सालाना कार्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन 54 करोड़ टन कम होगा, लॉजिस्टिक्स लागत में 1,207 करोड़ रुपये की बचत होगी और 89 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजन होगा। दूसरी परियोजना दिल्ली-जम्मू मार्ग पर दिल्ली और अंबाला के बीच 194 किमी के सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन बनाने की है। इसे 5,983 करोड़ रुपये की लागत से चार साल में पूरा किया जायेगा। इस सेक्शन में एक महत्वपूर्ण और 28 बड़े पुल बनेंगे। श्री वैष्णव ने कहा कि इस मार्ग पर क्षमता से ज्यादा बोझ है और इसलिए क्षमता बढ़ानी जरूरी थी। इस सेक्शन से दिल्ली के साथ हरियाणा में सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिले लाभान्वित होंगे। तीसरी परियोजना बेल्लारी से होसपेट के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण की है। इसकी अनुमानित लागत 2,372 करोड़ रुपये है और काम चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेल मंत्री ने बताया कि इस सेक्शन पर क्षमता से दोगुना बोझ है।यह खंड कर्नाटक को मुंबई से जोड़ने वाली लाइन पर है। इस परियोजना में 34 बड़े पुलों के निर्माण होंगे। इससे हर साल 14 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाई-उत्सर्जन कम होगा और लॉजिस्टिक्स लागत में 323 करोड़ रुपये की बचत होगी। परियोजना से 44 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजन होगा।
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