नई दिल्ली से एक अहम राजनीतिक खबर सामने आई है, जहाँ झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मंगलवार को केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से मुलाकात की। यह मुलाकात 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड को मिलने वाली ₹2736 करोड़ की लंबित अनुदान राशि को लेकर हुई, जो लंबे समय से केंद्र सरकार के पास अटकी हुई है।
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस दौरान केंद्र सरकार से लंबित फंड को शीघ्र जारी करने का औपचारिक आग्रह किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य की पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। फंड की कमी के कारण कई योजनाएँ या तो धीमी गति से चल रही हैं या पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि पंचायतों की रीढ़ है। इसी फंड से ग्रामीण सड़कें, पेयजल, स्वच्छता, आवास, पंचायत भवन, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाएँ संचालित की जाती हैं। लेकिन राशि के अभाव में जमीनी स्तर पर विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार ने केंद्र द्वारा तय की गई सभी औपचारिक प्रक्रियाओं और शर्तों का पालन किया है। इसके बावजूद राशि का रोका जाना राज्य के साथ अन्याय है। मंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लगातार सवाल कर रहे हैं और ग्रामीण जनता को जवाब देना सरकार के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने राज्य सरकार की बातों को ध्यान से सुना और आश्वासन दिया कि संबंधित मंत्रालय में इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, अब तक फंड जारी करने को लेकर कोई ठोस समयसीमा सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि इससे पहले झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठा था। उस समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच केंद्र-राज्य फंड को लेकर तीखी बहस देखने को मिली थी। सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार राजनीतिक द्वेष के कारण झारखंड के विकास कार्यों में बाधा डाल रही है।
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सदन में यह आरोप भी लगाया था कि केंद्रीय मंत्री उनसे मिलने का समय नहीं दे रहे हैं और जानबूझकर ₹2736 करोड़ की राशि रोकी जा रही है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी और केंद्र बनाम राज्य का विवाद और गहरा गया था।
राज्य सरकार का कहना है कि अगर यह राशि जल्द जारी नहीं होती है तो आने वाले महीनों में पंचायत स्तर पर कई योजनाएँ बंद करनी पड़ सकती हैं। इससे सीधे तौर पर गरीब, मजदूर, किसान और ग्रामीण आबादी प्रभावित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि 15वें वित्त आयोग की राशि का समय पर वितरण न होना न केवल विकास की रफ्तार को धीमा करता है, बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों में भी तनाव पैदा करता है। झारखंड जैसे राज्य, जहाँ ग्रामीण आबादी अधिक है, वहाँ इस फंड की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस मुलाकात के बाद क्या कोई ठोस फैसला लेती है या फिर यह मामला एक बार फिर लंबित रह जाता है। झारखंड सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही सकारात्मक निर्णय आएगा और रुका हुआ फंड राज्य को मिलेगा।
फिलहाल, दिल्ली में हुई यह मुलाकात राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे आने वाले दिनों में झारखंड के ग्रामीण विकास की दिशा तय हो सकती है।





