मुख्यमंत्री दावोस-यूके यात्रा में झारखंड की औद्योगिक क्षमता के साथ प्राचीन पाषाण विरासत को भी दिलाएंगे वैश्विक पहचान

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रांची, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की आगामी दावोस और यूनाइटेड किंगडम (यूके) यात्रा केवल राज्य की औद्योगिक क्षमता, निवेश संभावनाओं और शिक्षा के उन्नयन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह यात्रा झारखंड की प्राचीन पाषाण विरासत, मेगालीथिक भू-दृश्य और सांस्कृतिक निरंतरता को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने का भी प्रयास होगी। यह जानकारी मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।

 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन 19 से 23 जनवरी 2026 तक स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की वार्षिक बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में देश के कुल दस राज्य हिस्सा लेंगे।

 

मुख्यमंत्री सचिवालय ने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से वैश्विक समुदाय को यह तथ्य भी बताया जाएगा कि झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र को वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी की उस प्रथम भूमि के रूप में माना जाता है, जो समुद्र से ऊपर उभरी थी। यहां स्थित पंक्तिबद्ध मेगालीथ सूर्य की गति और दिन-रात की समयावधि से जुड़े हैं। साथ ही गुफाओं में विद्यमान प्राचीन भित्ति चित्र, जीवाश्मयुक्त वन प्रांतर और प्राकृतिक संरचनाएं एक दुर्लभ एवं अद्वितीय भू-दृश्य की निरंतरता को दर्शाती हैं।

 

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि झारखंड के ये पाषाण किसी भूले-बिसरे अतीत के अवशेष नहीं हैं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही जीवंत विरासत के प्रतीक हैं, जिनमें खगोल विज्ञान, मानव चेतना और सांस्कृतिक परंपराएं समाहित हैं। दावोस और यूके यात्रा के दौरान झारखंड का प्रतिनिधिमंडल इन तथ्यों को वैश्विक मंच पर रखेगा, ताकि अब तक उपेक्षित इन मेगालीथ को वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान और सम्मान दिलाया जा सके।

 

राज्य के सुदूर गांवों और जंगलों में संरक्षित महापाषाणकालीन भू-दृश्य इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि विरासत को समुदायों के भीतर समाहित रखते हुए किस प्रकार सुरक्षित रखा जा सकता है। यह दृष्टिकोण भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच सांस्कृतिक संरक्षण, नैतिक विरासत प्रबंधन, संग्रहालय साझेदारी और अनुसंधान सहयोग की अवधारणा से भी मेल खाता है।

 

हजारीबाग के पकरी बरवाडीह में स्थित मेगालीथ सूर्य की गति और इक्वीनॉक्स से संबंधित हैं, जिससे झारखंड के प्रागैतिहासिक काल को वैश्विक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान मिलता है। इन संरचनाओं की तुलना यूनाइटेड किंगडम के स्टोनहेंज जैसे प्रतिष्ठित स्थलों से की जा सकती है, जो यह दर्शाती है कि महाद्वीपों और युगों के पार मानव सभ्यता ने समय, मृत्यु और ब्रह्मांडीय व्यवस्था को पत्थरों में अंकित किया है।

 

इसके साथ ही इस्को के शैल चित्र, सोहराय और कोहबर पेंटिंग की जीवंत परंपरा, तथा मंडरो क्षेत्र के जीवाश्म मिलकर एक ऐसे दुर्लभ भू-दृश्य का निर्माण करते हैं, जहां प्राचीन इतिहास और वर्तमान मानव संस्कृति एक ही भौगोलिक क्षेत्र में सह-अस्तित्व में विद्यमान हैं।

 

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड दावोस और यूनाइटेड किंगडम में अपनी आर्थिक दृष्टि और विकास मॉडल प्रस्तुत करते हुए यह संदेश भी देने जा रहा है कि किसी भी राज्य या राष्ट्र का दीर्घकालिक विकास सांस्कृतिक निरंतरता और अतीत के प्रति सम्मान पर आधारित होना चाहिए।

 

अंततः यह कहा जा सकता है कि पाषाण युग से लेकर आधुनिक युग तक इतिहास रचता हुआ झारखंड, आज देश की अर्थव्यवस्था और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

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Author: kelanchaltimes

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