रांची शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है और हरमू नदी, बड़ा तालाब, कांके डैम, धुर्वा डैम और गेतलसूद डैम के आसपास फैले अवैध अतिक्रमण को दो सप्ताह के भीतर पूरी तरह हटाने का स्पष्ट और अंतिम निर्देश दिया है। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि जलाशयों के कैचमेंट एरिया पर हो रहे अवैध कब्जे, गंदगी और प्लास्टिक प्रदूषण के कारण शहर के जल स्रोत लगातार खतरे में हैं और यदि इन्हें अभी नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। अदालत ने जिला प्रशासन और नगर निगम को आपसी समन्वय के साथ विशेष अभियान चलाने का आदेश देते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में किसी तरह की ढिलाई या बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, प्लास्टिक कचरे और गंदगी को पूरी तरह साफ करने, इसकी तस्वीरों और विस्तृत रिपोर्ट के साथ अदालत में जानकारी देने का भी निर्देश दिया गया है, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि अदालत ने बड़ा तालाब, हरमू नदी और सभी प्रमुख डैमों के आसपास बने अवैध निर्माणों को चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने के बाद इन क्षेत्रों को नो-एंट्री ज़ोन घोषित किया जाए और कंटीले तार, बैरिकेडिंग या अन्य प्रभावी उपायों से घेराबंदी की जाए, ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके। नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने अपना पक्ष रखा, जबकि प्रार्थी पक्ष की अधिवक्ता खुशबू कटारिका ने अदालत को बताया कि बड़ा तालाब से गाद और कचरा हटाने के लिए अब तक विशेषज्ञों की रिपोर्ट सरकार के स्तर पर पेश नहीं की गई है और मुक्तिधाम के पास हरमू नदी में लगातार प्लास्टिक और घरेलू कचरा डाला जा रहा है। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा और जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम दिखने चाहिए। अदालत ने विशेष रूप से कांके डैम, धुर्वा डैम और गेतलसूद डैम को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए अब तक की गई कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया और तेजी लाने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि इसी महीने झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स परिसर की करीब 10 एकड़ जमीन पर हुए अवैध कब्जे को गंभीरता से लेते हुए 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने अभियान चलाकर दर्जनों कच्चे मकानों को ध्वस्त किया, कई इलाकों को कब्जा मुक्त कराया और अब बहुमंजिला अपार्टमेंट पर भी कार्रवाई जारी है। हाईकोर्ट के लगातार सख्त आदेशों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि राज्य में जल स्रोतों, पर्यावरण और सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ अब निर्णायक और कठोर कदम उठाए जाएंगे, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी।

डीएसपीएमयू में प्रशासनिक व अकादमिक समन्वय पर जोर, कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने की दो महत्वपूर्ण बैठकें
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रशासनिक और अकादमिक संभागों के साथ नियमित बैठक और संवाद को




