वीर बाल दिवस के अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया

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पाकुड़ : धर्म की रक्षा करने हेतु सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह के वीर साहिबजादो बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के अतुलनीय बलिदान को समर्पित वीर बाल दिवस के अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष अमृत पाण्डेय की अध्यक्षता में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में दुमका के पूर्व सांसद सुनील सोरेन उपस्थित हुए। संगोष्ठी के उपरांत दुमका के पूर्व सांसद सुनील सोरेन के साथ कार्यकर्ता गुरुद्वारा पहुंचे। वहां सभी कार्यकर्ताओं ने माथा टेका और सिख समुदाय के लोगों के साथ संवाद स्थापित किया।

इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद सुनील सोरेन ने कहा कि साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस दिन को सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह के दो साहिबजादों की याद में मनाया जाता है। उनकी वीरता और पराक्रम के सामने बड़े-बड़े वीर भी छोटे पड़ जाते हैं।

मुगलों के खिलाफ जंग
सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने साल 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इनके चार बेटे अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह भी खालसा का हिस्सा थे। उस समय पंजाब में मुगलों का शासन था। साल 1705 में मुगलों ने गुरु गोबिंद सिंह जी को पकड़ने पर पूरा जोर लगा, जिसके कारण उन्हें अपने परिवार से अलग होना पड़ा। इसलिए गुरु गोबिंद सिंह जी की पत्नी माता गुजरी देवी और उनके दो छोटे पुत्र जोरावर सिंह और फतेह सिंह अपने रसोइए गंगू के साथ एक गुप्त स्थान पर छिप गईं।लेकिन लालच ने गंगू के आंखों पर पट्टी बांध दी और उसने माता गुजरी और उनके पुत्रों को मुगलों को पकड़वा दिया। मुगलों ने इन खूब अत्याचार किए और उन्हें उनका धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर करने लगे, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। इस समय तक गुरु गोबिंद सिंह के दो बड़े पुत्र मुगलों के खिलाफ लड़ाई में शहीद हो चुके थे। अंत में मुगलों ने 26 दिसंबर के दिन बाबा जोरावर साहिब और बाबा फतेह साहिब को जिंदा दीवार में चुनवा दिया। उनकी सहादत की खबर सुनकर माता गुजरी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।

जिलाध्यक्ष अमृत पाण्डेय ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस हमें साहस और बलिदान की कहानी याद दिलाता है। जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने मुगल शासक के अत्याचारों का डटकर सामना किया और धर्म नहीं बदलने की कसम खाई। इन साहिबजादों ने अपनी जान की बाजी लगाकर धर्म के लिए निष्ठा का परिचय दिया। उन्होंने साबित किया कि धर्म केवल रस्मों-रिवाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है।

प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी ने कहा कि साहिबजादा जोरावर सिंह की उम्र 9 वर्ष थी और फतेह सिंह की 6 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में ही इन साहिबजादों ने अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इनका ये बलिदान इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो चुका है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए धैर्य और दृढ़ता बनाए रखें।वीर बाल दिवस हमें राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश देता है। इन साहिबजादों ने सभी धर्मों के लोगों को एकजुट होने का संदेश दिया था।

इस कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री रूपेश भगत ने किया

इस कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र त्रिवेदी, किसान मोर्चा प्रमंडलीय प्रभारी रामचंद्र साहा, नगर अध्यक्ष सोहन मंडल, गांधाईपुर मंडल अध्यक्ष मनोरंजन सरकार, दादपुर मंडल अध्यक्ष सुशांत घोष, दलाल सिंह, अश्वनी झा सहित कई कार्यकर्त्ता उपस्थित हुए ।

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