सख्त फैसलों और बेदाग न्यायिक करियर के लिए पहचाने जाते हैं जस्टिस तरलोक सिंह चौहान

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रांची। झारखंड हाईकोर्ट के 17वें चीफ जस्टिस के रूप में बुधवार को शपथ लेने वाले जस्टिस तरलोक सिंह चौहान का न्यायिक करियर बेदाग, सशक्त निर्णयों और न्यायपालिका में डिजिटल सुधारों को लागू करने के लिए जाना जाता है। 9 जनवरी 1964 को हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू में जन्मे जस्टिस चौहान ने शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी कर पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। 1989 में हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने सभी विधायी शाखाओं में गहरा अनुभव प्राप्त 2014 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश और फिर स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए जस्टिस चौहान ने पर्यावरण संरक्षण, बाल कल्याण और न्यायिक सुधारों के लिए कई ऐतिहासिक फैसले दिए। उन्होंने किशोर न्याय समिति, विधिक सेवा प्राधिकरण और ई-कोर्ट समिति का नेतृत्व करते हुए न्यायपालिका में डिजिटल बदलाव में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश न्यायपालिका ने ई-फाइलिंग, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल न्यायिक प्रक्रियाओं में नए मापदंड स्थापित किए। वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय न्यायपालिका का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में उनकी नियुक्ति की अधिसूचना राष्ट्रपति कार्यालय से 15 जुलाई को जारी हुई थी। बुधवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य सचिव अलका तिवारी ने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट को हिंदी और अंग्रेजी में पढ़ा। मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, राज्य सरकार के कई मंत्री, महाधिवक्ता राजीव रंजन और जस्टिस चौहान के परिजन उपस्थित रहे। जस्टिस चौहान ने जस्टिस एम.एस. रामचंद्र राव का स्थान लिया है, जिनका हाल ही में त्रिपुरा हाईकोर्ट में स्थानांतरण हुआ है। जस्टिस चौहान से राज्य की न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार को गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।
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