समाज की चेतना और संघर्ष साहित्य में होता है प्रतिबिंबित : सुदेश

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रांची :  पार्श्व अंतरराष्ट्रीय ट्रस्ट, वाईबीएन विश्वविद्यालय और जन कल्याण आवाम वन विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में रांची साहित्य महोत्सव का आयोजन सोमवार को रांची में किया गया।

कार्यक्रम में आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।

महोत्सव में प्रदेश की साहित्यिक विरासत, लोक संस्कृति, भाषाई समृद्धि और जनसरोकारों से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर सुदेश महतो ने कहा कि साहित्य वह दर्पण है जिसमें समाज की चेतना और संघर्ष प्रतिबिंबित होता है। साहित्य और संस्कृति को मजबूत बनाना ही सशक्त झारखंड की आधारशिला है।

उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने, संवेदनशीलता विकसित करने और संघर्ष की आवाज़ को स्वर देने का सशक्त माध्यम है। आने वाली पीढ़ियों के लिए साहित्यिक परंपरा को और अधिक समृद्ध और सुदृढ़ बनाने की जरूरत है।

कार्यक्र में साहित्यकार और शोधार्थी हुए शामिल

कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकार, शोधार्थी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी दर्ज की और झारखंड की भाषाई-सांस्कृतिक पहचान को नए आयाम देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ ममता मनीष सिन्हा ने झारखंड में साहित्य अकादमी के गठन करने का अनुरोध किया।

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुदेश महतो ने कहा कि जब वे कला संस्कृति मंत्रालय में थे, तब इस दिशा में पहल की गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार इन बौद्धिक विषयों पर विशेष ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर इस बौद्धिक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन और नई क्रांति लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वहीं वाईबीएन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रामजी यादव ने कहा कि वे शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में ठोस कार्य के लिए पूर्णतः समर्पित हैं।

कार्यक्रम में डॉ ममता मनीष सिन्हा, डॉ रणधीर वर्मा, प्रो जेबी पांडेय, विशाल कुमार सहित अन्य गन्यमान्य मौजूद थे।

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Author: kelanchaltimes

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