सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर सवाल, पुलिस पर झूठी कहानी गढ़ने का आरोप

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रांची/गोड्डाः गोड्डा जिले में आदिवासी नेता सूर्या हांसदा के एनकाउंटर में मारे जाने की ‘पुलिस की कहानी’ पर सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपई सोरेन ने इस घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। मरांडी ने कहा कि यह केवल एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि “जन सरोकार से जुड़ी एक आवाज की हत्या” है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा है कि पूरे मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के सीटिंग जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जानी चाहिए। गोड्डा जिले की पुलिस ने सोमवार को बोआरीजोर थाना क्षेत्र, धमनी पहाड़ के पास सूर्या हांसदा के एनकाउंटर में मारे जाने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, सूर्या पर 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे और वह कई संगीन अपराधों में फरार था। मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने उनके पास से हथियार बरामद किए थे। एसपी मुकेश कुमार ने बताया था कि गिरफ्तारी के बाद सूर्या को लेकर जब पुलिस की टीम हथियारों की बरामदगी के लिए जा रही थी तो उसके गैंग के सदस्यों ने पुलिस पर हमला करने की कोशिश की। इस बीच सूर्या ने पुलिस का हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया तो पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मार गिराया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एनकाउंटर को लेकर पुलिस की इस कहानी को झूठ करार दिया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि झारखंड में कुछ पुलिसकर्मी अपराधियों को संरक्षण देते हुए अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा की मौत केवल उनके वर्दी में छिपे कुछ “कायर और बुजदिल” अधिकारियों द्वारा कराई गई, जिन्हें आदिवासियों की आवाज से डर लगता है। उन्होंने कहा कि झूठे मामले, फर्जी एफआईआर और उत्पीड़न विरोध करने वालों से निपटने का आम तरीका बन गया है। इस घटना को लेकर पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘वक्त ने एक आदिवासी को बनाया अपराधी, लोकतंत्र ने दिया मंच, पर पुलिस ने छीन ली आख़िरी सांस… आदिवासी नेता सूर्या हांसदा का एनकाउंटर कई सवाल खड़े करता है। जब वे चार बार चुनाव लड़ चुके थे तो इसका मतलब साफ था कि वे मुख्यधारा से जुड़कर काम करना चाहते थे, लेकिन पुलिस द्वारा जिस हिसाब से कार्रवाई की गईं है, वह कई तरह के संदेह खड़ा करता है।“ पूर्व सीएम चंपई सोरेन ने कहा है कि चार बार चुनाव लड़ चुके स्व. सूर्या हांसदा की पत्नी ने देवघर में गिरफ्तारी के तुरंत बाद जिस बात की आशंका जताई थी, गोड्डा पहुंचते- पहुंचते वह सच हो गई। पिछले कुछ समय से, संथाल परगना में, कुछ खास लोगों के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को कुचलने की कोशिशें हो रही हैं। गोड्डा में स्व. सूर्या हांसदा के तथाकथित एनकाउंटर (?) के बाद उनके परिवार के बयानों से कहीं ना कहीं यह संदेश निकल कर आ रहा है कि अगर आप इस सरकार में आदिवासियों के पक्ष में एवं खनन माफिया के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो सरकारी तंत्र की मदद से आपको खामोश कर दिया जायेगा। सूर्या हांसदा की पत्नी सुशीला हांसदा और मां सूर्यमणी हांसदा ने भी पुलिस पर आरोप लगाया कि उनका परिवार जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की है और कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मामले में सीबीआई जांच कराने से डर रहे हैं। परिवार ने आरोप लगाया कि सूर्या की तबीयत खराब थी। वह पुलिस के कब्जे से भाग नहीं सकते थे और एनकाउंटर पूरी तरह फर्जी है।

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