घाटशिला उपचुनाव: जातीय समीकरण और सहानुभूति लहर से तय होगी जीत की दिशा

Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram

पूर्वी सिंहभूम।
घाटशिला विधानसभा उपचुनाव का सियासी पारा तेजी से चढ़ रहा है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही मुकाबला अब “सोरेन बनाम सोरेन” में सिमट गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दिवंगत विधायक रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन को मैदान में उतारकर सहानुभूति लहर पर दांव लगाया है, जबकि भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन पर एक बार फिर भरोसा जताया है। दोनों ही प्रत्याशी संथाल समाज से आते हैं, जिससे इस बार आदिवासी वोटों के बंटने की संभावना प्रबल है।

घाटशिला सीट पर करीब 45 प्रतिशत आदिवासी और 45 प्रतिशत ओबीसी मतदाता हैं। इनमें बंगाली भाषी और कुड़मी समुदाय की संख्या विशेष रूप से प्रभावशाली है, जबकि शेष मतदाता सामान्य और अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने भाषणों में संथाली भाषा का प्रयोग कर आदिवासी अस्मिता को केंद्र में रखने की कोशिश की है। दूसरी ओर भाजपा विकास, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दों पर जनता को साधने में जुटी है।

इस उपचुनाव में कुड़मी समुदाय को एसटी दर्जा देने की मांग बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरी है। आदिवासी संगठनों के विरोध के चलते यह विवाद झामुमो के परंपरागत वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक डॉ. प्रदीप बलमुचू की नाराजगी से इंडिया गठबंधन के समीकरणों में भी दरार की संभावना बन रही है।

स्थानीय स्तर पर रोजगार, पलायन, खदानों का बंद होना, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे मतदाताओं के मन में गहराई से असर डाल रहे हैं। जनता इस बार सहानुभूति बनाम एंटी-इनकम्बेंसी की स्थिति में बंटी दिख रही है।

 

यह उपचुनाव केवल दो उम्मीदवारों की लोकप्रियता की लड़ाई नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति की दिशा और जनभावना की परीक्षा भी साबित हो सकता है।

kelanchaltimes
Author: kelanchaltimes

Leave a Comment

Kelanchaltimes हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

नामांकन से नतीजे तक खर्च की निगरानी, तीन दौर में होगी प्रत्याशियों की जांच

रांची : निकाय चुनाव के दौरान प्रत्याशियों द्वारा किए जाने वाले चुनाव खर्च पर इस बार राज्य निर्वाचन आयोग की कड़ी निगरानी रहेगी। आयोग ने

यूजीसी के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर कर स्वर्ण महासंघ ने जताया विरोध

पूर्वी सिंहभूम। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया फैसलों के विरोध में गुरुवार को स्वर्ण महासंघ के आह्वान पर सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और

झारखंड के 25 वर्षों के सफर को नई दिशा देगा मजबूत और बहुआयामी बजट: मुख्यमंत्री

रांची। झारखंड राज्य 25 वर्षों का सफर तय कर चुका है। ऐसे में इस बार राज्य के लिए मजबूत, संतुलित और बहुआयामी बजट की आवश्यकता

रास्ता बंद किए जाने के विरोध में बार एसोसिएशन का अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

धनबाद। सदर अस्पताल के मार्ग को बंद किए जाने के विरोध में जिला बार एसोसिएशन गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला गया। अधिवक्ताओं के पेन