गोड्डा: हूल विद्रोह के महानायक और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिवीर शहीद चानकु महतो परगनैत की 210वीं जयंती सोमवार को धूमधाम से मनाई जाएगी। गोड्डा जिला अंतर्गत रंगमटिया गांव स्थित उनके स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
टैटोमिक कुर्मी विकास मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिनेश महतो ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि समाज और नई पीढ़ी को शहीद चानकु महतो के आदर्शों से रूबरू कराने के लिए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह आयोजन भव्य तरीके से किया जाएगा।
इतिहास के पन्नों में अमर है चानकु महतो का बलिदान
शहीद चानकु महतो का जन्म 9 फरवरी 1816 को गोड्डा के रंगमटिया गाँव में हुआ था। उनके पिता कारू महतो (कालू महतो) और माता बड़की माहताइन ने उनमें बचपन से ही राष्ट्रप्रेम के संस्कार भरे थे।
हूल विद्रोह (1855-56) के दौरान उन्होंने सिद्धू-कान्हू के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका था। 30 जून 1855 को भगनीडीह में हुई उस ऐतिहासिक सभा में, जहाँ 60 हजार संथाल, कुड़मी और अन्य स्थानीय लोग जुटे थे, चानकु महतो ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
क्रांतिकारी नारा: “आपोन माटी, आपोन दाना, पेट काटी नाँय देब खजाना..!”
(अर्थ: हमारी मिट्टी और हमारा अनाज है, हम खुद को कष्ट देकर अंग्रेजों को लगान/खजाना नहीं देंगे!)
कझिया नदी के तट पर दी गई थी फांसी
अंग्रेजों के विरुद्ध उनके कड़े तेवरों और विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश शासन ने 15 मई 1856 को उन्हें राजकचहरी के समीप कझिया नदी के तट पर सरेआम फांसी दे दी थी। चानकु महतो के साथ चालो जुलाहा, रामा गोप, राजवीर सिंह और भागीरथ मांझी जैसे साथियों ने भी इस विद्रोह में अहम योगदान दिया था।
कार्यक्रम की तैयारी पूरी
स्मारक स्थल पर जयंती समारोह को लेकर ग्रामीणों और समाज के लोगों में भारी उत्साह है। सोमवार को सुबह से ही स्मारक पर माल्यार्पण और सभा का दौर शुरू होगा, जिसमें जिले के कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।




