बसंतराय (गोड्डा): प्रखंड के महेशपुर गांव (समुद्रा) स्थित सत्संग मंदिर परिसर में संतमत सत्संग का 38वां वार्षिक अधिवेशन श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस दो दिवसीय समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और संतों के प्रवचनों से आध्यात्मिक लाभ उठाया।

तीन गुणों से ऊपर उठकर ही संभव है मोक्ष
मुख्य प्रवचनकर्ता के रूप में महर्षि मेंहीं धाम, मनियारपुर (बौसी) से पधारे स्वामी दयानंद जी महाराज ने संसार की प्रकृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
- संसार के तीन गुण: इस सृष्टि में सत, रज और तम गुणों की प्रधानता है।
- मोक्ष का मार्ग: जो साधक सद्गुरु की शरण में जाकर शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करते हैं और सतोगुण में रहकर ध्यान करते हैं, उन्हें निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- आत्मा की श्रेष्ठता: स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि ‘आत्मा से बड़ा कोई देवता नहीं है’।
सत्संग: चारों फलों की प्राप्ति का मार्ग
तीर्थों की तुलना में सत्संग की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि तीर्थ जाने से पुण्य मिलता है, लेकिन सत्संग में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों फलों की प्राप्ति होती है। उन्होंने सत्संग को ‘चलता-फिरता तीर्थराज’ बताते हुए इसकी तुलना प्रयागराज से की:
- गंगा: राम भक्ति का प्रचार।
- यमुना: विधि-निषेध (क्या करें, क्या न करें) का ज्ञान।
- सरस्वती: सुषुम्ना मार्ग का आंतरिक ज्ञान।
समाज सुधार में सत्संग की भूमिका
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व समाजसेवी राजेश झा ने कहा कि संतों के प्रवचन का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। विशेषकर नशा उन्मूलन और आपराधिक प्रवृत्तियों पर लगाम लगाने में सत्संग एक सशक्त माध्यम है। इससे समाज में सद्गुणों का विस्तार होता है।
इन संतों की रही गरिमामयी उपस्थिति
अधिवेशन में स्वामी दयानंद जी महाराज के साथ-साथ कई अन्य विद्वान संतों ने भी अपने विचार रखे:
- स्वामी उत्तमानंद जी महाराज
- अनुपम बाबा, सचिवानंद जी महाराज
- भवेशानंद जी महाराज, सूर्यानंद स्वामी
- अवधेश बाबा, देवनारायण बाबा और गोपालानंद बाबा
कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय गणमान्यों द्वारा संतों के माल्यार्पण के साथ हुई। आश्रम के व्यवस्थापक संत घनश्याम जी महाराज ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन को सफल बनाने में महेशपुर के ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का सक्रिय सहयोग रहा।





