साहेबगंज: गंगा नदी की गोद में बसे साहेबगंज में डॉल्फिनों के संरक्षण और उनकी जनसंख्या के सटीक आकलन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार (10 फरवरी 2026) को चाणन स्थित डॉल्फिन व्याख्या केंद्र में एक दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
वैज्ञानिक पद्धति से होगा डॉल्फिन का आकलन
कार्यशाला का विषय ‘रेंजवाइड एस्टीमेशन ऑफ रिवरीन एवं एस्टुएरिन डॉल्फिन पॉपुलेशन इन इंडिया’ (द्वितीय चरण) रहा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) प्रबल गर्ग ने किया। इस अवसर पर ‘नमामि गंगे’ के डीपीओ अमित मिश्रा भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में DFO प्रबल गर्ग ने कहा:
“डॉल्फिन का संरक्षण हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अनिवार्य है। इसके लिए वैज्ञानिक और मानकीकृत आकलन पद्धति का होना आवश्यक है। प्रशिक्षण में सीखी गई विधियां भविष्य में सटीक सर्वेक्षण सुनिश्चित करेंगी।”
विशेषज्ञों ने दिया तकनीकी प्रशिक्षण
भारतीय वन्यजीव संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. सनी देउरी ने डॉल्फिन आकलन के परिचय और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रस्तुति दी। तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों ने वन कर्मियों और डॉल्फिन वाचरों को गहन प्रशिक्षण दिया:
सुरोजित मोइत्रा: डॉल्फिन पर्यावास (Habitat) और मानवीय गतिविधियों की रिकॉर्डिंग पद्धति के बारे में बताया।
विजय प्रताप सिंह: नदीय जीव-जंतुओं की निगरानी और आंकड़ों के वैज्ञानिक संकलन की विधि पर प्रकाश डाला।
गंगा तट पर व्यावहारिक प्रशिक्षण (Field Demonstration)
सिद्धांतों को व्यवहार में बदलने के लिए कार्यशाला के बाद चाणन घाट पर फील्ड डेमोंस्ट्रेशन का आयोजन किया गया। भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम ने वन विभाग के फील्ड कर्मचारियों को सर्वेक्षण में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक उपकरणों के संचालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराया। प्रतिभागियों को गंगा नदी में डॉल्फिन की पहचान और गणना की बारीकियों को स्थल पर ही समझाया गया।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से साहेबगंज क्षेत्र में आगामी डॉल्फिन सर्वेक्षण कार्य को और अधिक सुदृढ़ और वैज्ञानिक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।





