मेड इन बिहार” की नई परिकल्पना: अर्जुन वृक्ष पर विधायक मैथिली ठाकुर की दूरदर्शी पहल

Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram

पटना । बिहार विधानसभा में शून्यकाल के दौरान अलीनगर विधायक मैथिली ठाकुर ने उत्तर बिहार के विकास को नई दिशा देने वाली एक अभिनव और दूरगामी मांग उठाई। उन्होंने अर्जुन वृक्ष के व्यापक रोपण, संरक्षण तथा उसकी छाल के राज्य में ही प्रसंस्करण के लिए “मेड इन बिहार” मेगा हर्बल प्रोजेक्ट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उनकी यह पहल केवल एक औद्योगिक मांग नहीं, बल्कि रोजगार, आयुर्वेद, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ने वाली समग्र विकास दृष्टि के रूप में देखी जा रही है।

 

अर्जुन वृक्ष: आयुर्वेद की अमूल्य धरोहर

 

अर्जुन (टर्मिनेलिया अर्जुना) का उल्लेख आयुर्वेद में विशेष रूप से हृदय रोगों के उपचार में किया गया है। इसकी छाल से काढ़ा, चूर्ण, टैबलेट, घृत और अर्जुनारिष्ट जैसी औषधियां तैयार की जाती हैं। यह हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और क्षय रोग जैसे गंभीर रोगों में लाभकारी मानी जाती है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार अर्जुन छाल हृदय को सशक्त बनाने और रक्त संचार को संतुलित रखने में सहायक होती है। यदि इसका वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्करण हो तो यह बिहार के लिए औषधीय संपदा का बड़ा स्रोत बन सकता है।

 

कच्चे माल से उद्योग तक: बिहार को मिले पूरा लाभ

 

विधायक ने सदन में यह भी कहा कि वर्तमान में उत्तर बिहार से अर्जुन की कच्ची छाल बाहर भेज दी जाती है, जिससे स्थानीय किसानों और युवाओं को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता। यदि राज्य में ही प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएं तो उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक पूरी श्रृंखला बिहार में विकसित हो सकती है। इससे “मेड इन बिहार” ब्रांड को मजबूती मिलेगी और राज्य आयुर्वेदिक उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान बना सकेगा।

 

अलीनगर बनेगा परिवर्तन का केंद्र

 

मैथिली ठाकुर ने सुझाव दिया कि इस योजना की शुरुआत अलीनगर क्षेत्र से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जाए। इससे संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) को बढ़ावा मिलेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। यह पहल अलीनगर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे मिथिला और बिहार को आर्थिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी त्रिस्तरीय लाभ पहुंचा सकती है।

 

युवा सोच और क्रांतिकारी दृष्टि

 

सदन में उठी यह मांग परंपरागत राजनीतिक मुद्दों से अलग और विकासोन्मुख सोच का प्रतीक मानी जा रही है। औषधीय वानिकी और हर्बल उद्योग को राज्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की यह पहल युवा नेतृत्व की दूरदर्शिता और नवाचार की भावना को दर्शाती है। यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो अलीनगर औषधीय उद्योग का प्रमुख केंद्र बन सकता है और उत्तर बिहार “हर्बल हब” के रूप में उभर सकता है।

 

यह प्रस्ताव केवल एक मांग नहीं, बल्कि हरित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बिहार की ओर बढ़ता हुआ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा

kelanchaltimes
Author: kelanchaltimes

Leave a Comment

Kelanchaltimes हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

डीएसपीएमयू में प्रशासनिक व अकादमिक समन्वय पर जोर, कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने की दो महत्वपूर्ण बैठकें

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रशासनिक और अकादमिक संभागों के साथ नियमित बैठक और संवाद को

प्रतियोगिता में परिणाम से अधिक अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण – कुलपति डॉ राजीव मनोहर

DSPMU के प्रतिभागियों का शानदार प्रदर्शन, 39वें AIU यूथ फेस्टिवल में कई श्रेणियों में जीते सम्मान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने AIU

डीएसपीएमयू के कुलपति के रूप में प्रो. राजीव मनोहर ने संभाला पदभार, शिक्षकों को दिया नियमित और गुणवत्तापूर्ण कक्षाएं लेने का निर्देश

रांची। प्रो. राजीव मनोहर ने आज पूर्वाह्न 10 बजे Dr. Shyama Prasad Mukherjee University (डीएसपीएमयू), रांची के कुलपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। वे

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय परिसर में श्रद्धा और परंपरा के संग गूंजा सरना झंडा गड़ी उत्सव, युवाओं ने लिया संस्कृति संरक्षण का संकल्प

रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची के न्यू बिल्डिंग परिसर में आज आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व में पारंपरिक