घाटशिला के दाहीगोड़ा सब्जी मार्केट में खुले आसमान के नीचे व्यापार करने वाली गरीब महिलाओं को भीषण गर्मी से बचाने के लिए समाजसेवी सावरमल अग्रवाल और उनके परिवार ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने 50 से अधिक सब्जी और मछली बेचने वाली महिलाओं को गमछा प्रदान किया। इस कार्य में उनके साथ परिवार के सदस्यों और स्थानीय समाजसेवियों ने भी भागीदारी निभाई। गमछा पाकर महिलाओं के चेहरे खिल उठे और उन्होंने आभार व्यक्त किया।
भीषण गर्मी में ढाल बनी समाजसेवा: दाहीगोड़ा मार्केट में महिला विक्रेताओं को मिली राहत
घाटशिला के दाहीगोड़ा सर्कस मैदान स्थित सब्जी मार्केट में चिलचिलाती धूप और प्रचंड गर्मी का सामना कर रही महिला विक्रेताओं के लिए समाजसेवी सावरमल अग्रवाल और उनका परिवार उम्मीद की किरण बनकर पहुँचा। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी सक्रियता के लिए मशहूर सावरमल अग्रवाल, उनके पुत्र उमेश अग्रवाल एवं पुत्रवधू ज्योति अग्रवाल ने मार्केट में पहुंचकर सब्जी और मछली बेचने वाली 50 जरूरतमंद महिलाओं को गमछा भेंट किया।
खुले आसमान के नीचे मेहनत करने वालों का सम्मान
सब्जी मार्केट में कई ऐसी महिलाएं हैं जो सुबह से शाम तक खुले आसमान के नीचे धूप में बैठकर अपना पेट पालती हैं। बढ़ती गर्मी और लू से उन्हें राहत मिले, इसी उद्देश्य से अग्रवाल परिवार ने यह कदम उठाया। समाजसेवी सावरमल अग्रवाल ने बताया कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इन मेहनतकश महिलाओं को राहत पहुँचाकर हमें आत्मिक शांति मिली है।
सामुदायिक सहयोग की अनूठी मिसाल
इस मानवीय कार्य में सावरमल अग्रवाल के परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग दिया। कार्यक्रम में अमलान रॉय, शिक्षक अजय चक्रवर्ती, अजीत सिंह और विक्की अग्रवाल की उपस्थिति रही, जिन्होंने सेवा कार्य में हाथ बँटाया।
मुस्कुराती महिलाओं ने जताया आभार
हाथ में गमछा मिलते ही गरीब महिला विक्रेताओं की खुशी देखते ही बनती थी। उन्होंने समाजसेवी परिवार के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी भीषण गर्मी में किसी ने उनकी सुध ली, यह उनके लिए बड़ी बात है। इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है और अन्य लोगों के लिए भी यह एक प्रेरणा का स्रोत बना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटशिला जैसे छोटे से शहर में इस तरह की संवेदनशीलता समाज को एक बेहतर दिशा देने का काम करती है।






