विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर नुक्कड़ नाटक से बच्चों के अधिकारों का संदेश दिया गया

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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर पाकुड़िया के दुर्गापुर गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। लोक कल्याण सेवा केंद्र के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बाल श्रम के दुष्परिणाम, बच्चों के शिक्षा के अधिकार और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। किशोरियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर बाल श्रम के खिलाफ संदेश दिया। ग्रामीणों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लिया।

 

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया गया जागरूकता संदेश

पाकुड़िया। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर दुर्गापुर गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बाल श्रम उन्मूलन एवं बच्चों के अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। लोक कल्याण सेवा केंद्र, पाकुड़िया के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम 30 अप्रैल से संचालित 44 दिवसीय राज्यव्यापी बाल मजदूरी विरोधी अभियान के समापन अवसर पर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ग्रामीणों के साथ एक बैठक से हुई, जिसमें बाल श्रम के दुष्परिणामों, बच्चों के शिक्षा के अधिकार तथा बाल श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है तथा उन्हें उनके मूल अधिकारों से वंचित कर देता है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को मजदूरी के बजाय शिक्षा से जोड़ने का प्रयास करे।
बैठक के दौरान उपस्थित ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी गई कि बाल श्रम कानून के तहत बच्चों से मजदूरी कराना दंडनीय अपराध है। बच्चों को विद्यालय भेजना और उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। लोगों से बाल श्रम के खिलाफ सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और ऐसी घटनाओं की जानकारी संबंधित विभाग को देने की अपील की गई।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण किशोरियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। नाटक के माध्यम से बाल श्रम की समस्या को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया और यह संदेश दिया गया कि बच्चों का स्थान कार्यस्थलों पर नहीं बल्कि विद्यालयों में होना चाहिए। प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक बचपन का अधिकार प्राप्त है।
नुक्कड़ नाटक ने उपस्थित ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से यह संदेश दिया कि यदि समाज एकजुट होकर प्रयास करे तो बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम में सोहेल अख्तर और अनवर अंसारी ने बाल श्रम उन्मूलन के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने लोगों को बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, किशोरियां और युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का सामूहिक संकल्प लिया।
rohini shree
Author: rohini shree

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