पाकुड़। बंधुआ मजदूरी की शिकायत मिलने पर पहले समुचित जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में बंधुआ मजदूर है या नहीं। जांच के बाद ही नियमानुसार विमुक्ति की कार्रवाई की जाए। यह निर्देश उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने बुधवार को बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, पहचान एवं बचाव के लिए गठित सतर्कता समिति और रेस्क्यू टीम की समीक्षा बैठक में दिया।
बैठक में बंधुआ मजदूरी की पहचान, रोकथाम, रेस्क्यू और विमुक्ति की कार्रवाई को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। उप विकास आयुक्त ने कहा कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उचित जांच की जाए, ताकि वास्तविक बंधुआ मजदूरों को कानूनी संरक्षण और आवश्यक सहायता मिल सके।
उन्होंने विमुक्त मजदूरों को सरकार की पात्र सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने और उनके पुनर्वास एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं श्रम अधीक्षक गिरीश चन्द्रा ने रेस्क्यू और विमुक्ति के दौरान निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया।
समिति सदस्य पीटर मरांडी ने माइंस क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया। बैठक में उप विकास आयुक्त ने महिला स्वयं सहायता समूहों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए अग्रणी बैंक प्रबंधक को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी, समिति सदस्य और रेस्क्यू टीम के सदस्य मौजूद रहे।





