कुरसेला (कटिहार): गंगा और कोसी के जलस्तर में शुक्रवार से मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन कुरसेला परिक्षेत्र में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। बाढ़ प्रभावित परिवार रेलवे माल गोदाम, बांध, सड़क किनारे और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। वहीं, कई इलाकों में आवागमन पूरी तरह बाधित है और लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है।
जिला प्रशासन के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है। पशुपालकों के बीच पशु चारा के रूप में भूसा भी वितरित किया जा रहा है। हालांकि, हरे चारे के अभाव में पशुओं के दूध उत्पादन में कमी आई है, जिसके कारण प्रखंड क्षेत्र में दूध की किल्लत की स्थिति बन गई है। पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए हरे चारे की तलाश में काफी दूर तक जाना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में नवजात बच्चों के लिए कुछ सामुदायिक रसोई में दूध की व्यवस्था की गई है, लेकिन पानी से घिरे कई सामुदायिक किचन तक दूध की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। समेली प्रखंड की मुरादपुर पंचायत के भदैया टोला, दरमाही टोला और स्कूल टोला समेत कई जगहों पर सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ित परिवारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बच्चों के लिए सामुदायिक रसोई में नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराने की मांग जिला प्रशासन से की है।
शुक्रवार की रात पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी कुरसेला पहुंचे और बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने रेलवे माल गोदाम में शरण लिए बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच सहयोग राशि का वितरण किया। इस दौरान सांसद ने बाढ़ राहत व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ आपदा के नाम पर लूट मची हुई है। कुल मिलाकर कुरसेला और समेली प्रखंड की मुरादपुर पंचायत के विभिन्न टोला-मोहल्लों में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।




