16वें वित्त आयोग से झारखंड सरकार केंद्रीय करों में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग करेगी

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रांची  : 16 वें वित्त आयोग के साथ होने वाली बैठक में राज्य सरकार, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग प्रमुखता से उठाये जाने की संभावना है. साथ ही सरकार आयोग की अनुशंसा के अनुरूप हिस्सेदारी नहीं मिलने का मामला भी उठायेगी. केंद्रीय करों में हिस्सेदारी निर्धारित करने में वन क्षेत्र को दिये गये वेटेज में डेंस फॉरेस्ट को आधार बनाये जाने से हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाये जाने की संभावना है.
जानकारी के मुताबिक 16 वें वित्त आयोग के साथ 30 मई को राज्य सरकार की महत्वपूर्ण बैठक होनी है. इसमें राज्य सरकार द्वारा अपनी वित्तीय स्थिति, विकास और पिछड़ेपन का उल्लेख करते हुए केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, अनुदान बढ़ाने और जीएसटी कंपनसेशन की मांग किये जाने की संभावना है. इसके अलावा अतिरिक्त सहायता अनुदान की भी मांग किये जाने की संभावना है. उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के समक्ष भी केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ा कर 50 प्रतिशत करने की मांग की गयी थी. लेकिन 15वें वित्त आयोग ने 14वें वित्त आयोग से भी कम हिस्सेदारी निर्धारित कर दी थी. 14वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत निर्धारित की थी. 15वें वित्त आयोग से सरकार ने केंद्रीय करों में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की मांग की थी. लेकिन 15 वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत निर्धारित की थी. जम्मू-कशमीर को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी देने के लिए एक प्रतिशत की कटौती की गयी थी.
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा पिछले कई वित्त आयोगों की अनुशंसा के आलोक में पूरी राशि नहीं मिलने का मुद्दा भी 30 मई को होने वाली बैठक उठाये जाने की संभवना है. आंकड़ों के अनुसार, 11वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आलोक में वास्तविक लाभ में लगातार गिरावट दर्ज की गयी है. 11वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्य को 29.5 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की अनुशंसा की थी. हालांकि राज्य को सिर्फ 27.10 प्रतिशत ही मिल पाया था. यानी अनुशंसा के आलोक में 2.4 प्रतिशत कम राशि मिली थी. इसी तरह 14वें वित्त आयोग द्वारा की गयी अनुशंसा के आलोक में 7.10 प्रतिशत राशि कम मिली थी.
राज्य सरकार ने 14वें वित्त आयोग के समक्ष केंद्रीय करों में हिस्सेदारी तय करने के लिए फॉरेस्ट को वेटेज देने की मांग उठायी थी. राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 14वें वित्त आयोग ने फॉरेस्ट को 7.5 प्रतिशत वेटेज देने की अनुशंसा की थी. 15वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य सरकार ने वन क्षेत्र से विकास के प्रभावित होने और योजनाओं की लागत बढ़ने का मुद्दा उठाते हुए फॉरेस्ट को 10 प्रतिशत वेटेज देने की मांग की थी. 15वें वित्त आयोग ने राज्य की मांग को स्वीकार करते हुए फॉरेस्ट को 10 प्रतिशत वेटेज देने की अनुशंसा की. हालांकि हिस्सेदारी की गणना के लिए डेंस फॉरेस्ट को आधार बनाये जाने की वजह से राज्य को लाभ के बदले नुकसान हो गया. सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार 16 वें वित्त आयोग से डेंस फॉरेस्ट के बदले टोटल फॉरेस्ट कवर को आधार बनाने का अनुरोध करेगी.
राज्य सरकार द्वारा आर्थित पिछड़ेपन के आधार पर विकास योजनाओं के लिए सहायता अनुदान देने की मांग करेगी. राज्य के आर्थिक पिछड़ेपन को दिखाने के लिए प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े को बतौर उदाहरण पेश किये जाने की संभावना है. राज्य सरकार द्वारा तैयार आंकड़ों के अनुसार, झारखंड प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य के 28 राज्यों में 25वें पायदान पर खड़ा है. राज्य गठन के वक्त झारखंड प्रति व्यक्ति आय के मामले में 26वें पायदान पर था. राज्य सरकार द्वारा प्रति व्यक्ति आमदनी की इस खाई को पाटने के लिए विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन की मांग किए जाने की संभवना है. सरकार ने 15वें वित्त आयोग से 1.5 लाख करोड़ रुपये देने की मांग की थी. इसके बाद 3.00 लाख करोड़ रुपये मांगे जाने की संभावना है.
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