रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को मनरेगा की मजबूती और इसके अधिकार-आधारित स्वरूप की रक्षा के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख सामाजिक संगठनों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार की नई नीतियों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए मनरेगा को बचाने के लिए एक ‘साझा रणनीतिक समन्वय’ पर सहमति बनी।

बैठक में दिग्गजों का जमावड़ा
इस महत्वपूर्ण चर्चा में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कांग्रेस प्रभारी के. राजू, रचनात्मक कांग्रेस के नेशनल चेयरमैन संदीप दीक्षित, प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. ज्यां द्रेज, और प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे व दयामणि बारला समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।

प्रमुख चिंता: अधिकार-आधारित ढांचे को खतरा
बैठक में विशेष रूप से ‘VB GRAM G’ (संभावित नई नीति) पर गंभीर चिंता जताई गई। सामाजिक संगठनों और कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह मनरेगा के मूल अधिकार-आधारित स्वरूप को कमजोर कर सकता है।
निखिल डे ने कहा कि मनरेगा ने गरीबों को कर्ज के बंधन और शोषण से मुक्ति दिलाई है, इसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

संदीप दीक्षित ने जोर दिया कि मनरेगा ने मजदूरी का एक न्यूनतम मानक तय किया है, जिसे बदलना श्रमिकों के हितों के खिलाफ होगा।

सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगें
सामाजिक कार्यकर्ताओं (जेम्स हेरेंज, बलराम व अन्य) ने जमीनी अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित मांगें रखीं:
- बिना ग्राम सभा की अनुमति के जॉब कार्ड डिलीट न किए जाएं।
- काम मांगने पर काम की गारंटी और समय पर भुगतान सुनिश्चित हो।
- मस्टर रोल पंचायत स्तर पर ही जारी किए जाएं।
- ‘काम मांगो अभियान’ के तहत सोशल ऑडिट को और सशक्त बनाया जाए।
बड़ी घोषणाएं और आगामी कार्ययोजना
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने अभियान को गति देने के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक घोषणाएं कीं:
- टास्क फोर्स का गठन: राज्य स्तर पर मनरेगा टास्क फोर्स बनाई जाएगी।
- जिला कोऑर्डिनेटर: हर जिले में मनरेगा कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति होगी।
- विधायकों की जिम्मेदारी: प्रत्येक विधायक अपने क्षेत्र में ‘काम मांगो अभियान’ का मॉडल नेतृत्व करेंगे।
- प्रशिक्षण: ब्लॉक स्तर पर संवाद और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
आंकड़ों में ‘काम मांगो अभियान’ की सफलता
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने हालिया आंकड़ों के जरिए अभियान की मजबूती पेश की:
- भागीदारी: 2-5 फरवरी 2026 के बीच 1.74 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।
- नए जॉब कार्ड: 17,914 नए कार्ड बनाए गए।
- महिला सशक्तिकरण: वर्तमान में 52 प्रतिशत जॉब कार्ड महिलाओं के नाम पर हैं।
- उपलब्धि: राज्य में अब तक 1017.65 लाख मानव-दिवस सृजित किए जा चुके हैं।
यह बैठक इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में झारखंड में मनरेगा के मुद्दों पर सरकार और सिविल सोसायटी मिलकर केंद्र की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार करेंगे।




