भारत का पाकिस्तान पर ‘जल प्रहार’: सिंधु जल संधि रद्द होने के बाद चिनाब नदी पर मेगा प्रोजेक्ट शुरू, ₹5129 करोड़ का टेंडर जारी

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नई दिल्ली/जयपुर | फरवरी 09, 2026, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी ‘वॉटर डिप्लोमेसी’ (जल कूटनीति) को आक्रामक स्तर पर ले जाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करने के अपने फैसले पर मुहर लगाते हुए, भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए औपचारिक रूप से टेंडर जारी कर दिया है।

सावलकोट प्रोजेक्ट: पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती

सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी NHPC (एनएचपीसी) ने इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए ₹5,129.03 करोड़ का टेंडर आमंत्रित किया है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के रामबन और उधमपुर जिलों के बीच चिनाब नदी पर स्थित होगी।

  • क्षमता: 1,856 मेगावाट (MW) बिजली उत्पादन।
  • निर्माण अवधि: प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 3,285 दिन (लगभग 9 साल) का समय तय किया गया है।
  • मुख्य कार्य: इसमें डाइवर्जेंट टनल, कोफर डैम, मांडिया नाला डीटी, और डैम से जुड़ी अन्य सहायक संरचनाओं का निर्माण शामिल है।
  • बोली प्रक्रिया: टेंडर के लिए ऑनलाइन बोली 12 मार्च 2026 से शुरू होगी और 20 मार्च 2026 को समाप्त होगी।
“हमारा पानी, हमारे किसान”: केंद्रीय मंत्रियों का कड़ा रुख

जयपुर में बीजेपी मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने स्पष्ट किया कि भारत अब पाकिस्तान को एक बूंद पानी अतिरिक्त देने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा:

 “सिंधु नदी का पानी रोककर उसे हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली की ओर मोड़ा जाएगा। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार है। अब यह पानी भारत के प्यासे शहरों और खेतों की सिंचाई के काम आएगा।”

वहीं, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1960 की संधि को “ऐतिहासिक अन्याय” बताते हुए कहा कि भारत अब किसी भी परमाणु धमकी या अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने इसे भारतीय किसानों के हक की बहाली बताया।

क्यों रद्द हुई 65 साल पुरानी संधि?

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलज (पूर्वी नदियाँ) भारत को और सिंधु, झेलम, चिनाब (पश्चिमी नदियाँ) पाकिस्तान को दी गई थीं। हालांकि, अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या हुई थी, भारत ने “आतंक और पानी साथ-साथ नहीं चल सकते” के सिद्धांत पर इस संधि को निलंबित कर दिया।

पाकिस्तान की बौखलाहट और अंतरराष्ट्रीय स्थिति

पाकिस्तान इस मुद्दे को ‘एक्ट ऑफ वॉर’ (युद्ध की कार्रवाई) करार दे रहा है और हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) का दरवाजा खटखटा चुका है। हालांकि, भारत ने इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को अवैध बताते हुए किसी भी तकनीकी डेटा को साझा करने से इनकार कर दिया है।

सावलकोट प्रोजेक्ट न केवल जम्मू-कश्मीर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक कड़ा रणनीतिक संदेश भी है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा और सहयोग एक साथ चलेंगे, और सीमा पार आतंकवाद की कीमत अब पाकिस्तान को अपने जल संकट के रूप में चुकानी पड़ सकती है।

 

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Author: gaytri

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