भागलपुर (केलांचल टाइम्स): केंद्र सरकार की ‘मजदूर विरोधी’ नीतियों और नए लेबर कोड के खिलाफ भागलपुर के मजदूर संगठनों ने बिगुल फूंक दिया है। शुक्रवार को कजवलीचक स्थित सेवा कार्यालय में आयोजित एक साझा संवाददाता सम्मेलन में ट्रेड यूनियनों ने 4 लेबर कोड को मजदूरों के अस्तित्व के लिए खतरा बताते हुए 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है।
“29 श्रम कानूनों को खत्म कर संविधान पर हमला”
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऐक्टू, सीटू, एआईयूटीयूसी, इंटक और एटक के नेताओं ने कहा कि सरकार ने दशकों के संघर्षों और कुर्बानियों से हासिल किए गए 29 श्रम कानूनों को खत्म कर दिया है।
- गुलामी की ओर धकेलने की साजिश: नेताओं का आरोप है कि ये 4 लेबर कोड मजदूरों को 150 साल पुरानी स्थिति में धकेल देंगे, जहाँ वे केवल मालिकों के ‘गुलाम’ बनकर रह जाएंगे।
- कॉरपोरेट का मुनाफा: उन्होंने कहा कि “इज ऑफ डूइंग बिजनेस” के नाम पर मजदूरों का खून चूसकर कॉरपोरेट घरानों का मुनाफा सुनिश्चित किया जा रहा है।
मनरेगा और कृषि नीति पर उठाए सवाल
यूनियनों ने हालिया सरकारी बदलावों पर भी तीखा हमला बोला:
- मनरेगा का अंत: मनरेगा को खत्म कर ‘वीबी-ग्रामजी कानून 2025’ लाने की आलोचना की गई। नेताओं ने कहा कि इससे रोजगार की गारंटी खत्म हो जाएगी और गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा।
- श्रम शक्ति नीति 2025: इस नीति में श्रम को ‘अधिकार’ के बजाय ‘धर्म’ (नैतिक कर्तव्य) के रूप में परिभाषित करने को अधिकारों का हनन बताया गया।
- अमेरिकी कृषि डील: आरोप लगाया गया कि अमेरिका के साथ हुई कृषि डील से भारतीय किसानों का संकट बढ़ेगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था बर्बाद होगी।
12 फरवरी को चक्का जाम की तैयारी
ट्रेड यूनियनों ने घोषणा की कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन लेबर कोड के खिलाफ 12 फरवरी 2026 को भारत बंद और आम हड़ताल की जाएगी। इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी अपना समर्थन दिया है।
प्रमुख उपस्थिति
इस संवाददाता सम्मेलन में मुकेश मुक्त (ऐक्टू), दशरथ प्रसाद (सीटू), दीपक कुमार (एआईयूटीयूसी), ई. रवि कुमार (इंटक), डॉ. सुधीर शर्मा (एटक) और पूनम केशरी (सेवा) ने मुख्य रूप से अपनी बात रखी। मौके पर सिकंदर तांती, संजय कुमार राय, मनोहर मंडल, बेबी देवी और मनोहर शर्मा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।





