देवघर में अब हर ब्लॉक स्तर पर डायलिसिस की सुविधा, किडनी मरीजों को मिलेगा बड़ी राहत

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देवघर : स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में अब डायलिसिस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। यह निर्णय किडनी रोगियों को राहत देने और उनकी जीवनशैली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अब मरीजों को डायलिसिस के लिए सुदूर जिला अस्पताल की ओर रुख नहीं करना होगा।

जिले के नागरिकों के लिए यह पहल कई मायनों में ऐतिहासिक कही जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल सर्जन द्वारा सभी सीएचसी प्रभारियों को पत्र भेजा गया है, जिसमें उन्हें अपने-अपने केंद्रों में डायलिसिस यूनिट के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित कर उसकी रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजने को कहा गया है।

डायलिसिस: जीवन रक्षक प्रक्रिया

डायलिसिस उन मरीजों के लिए अनिवार्य चिकित्सा प्रक्रिया है, जिनकी किडनी पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है। यह प्रक्रिया शरीर से विषैले तत्वों और अतिरिक्त तरल पदार्थों को बाहर निकालती है, जो सामान्य रूप से किडनी द्वारा किया जाता है। देवघर सहित झारखंड के ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे मरीज हैं जो डायलिसिस के लिए शहरों की ओर रुख करते हैं, जिससे समय, पैसा और शारीरिक थकान तीनों का बोझ बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विभाग की पहल

स्वास्थ्य विभाग ने अब जिले के प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के अंतर्गत लिया गया है। इस योजना के तहत बीपीएल और आयुष्मान कार्ड धारकों को मुफ्त डायलिसिस की सुविधा मिलेगी, जबकि सामान्य मरीजों के लिए भी बेहद कम शुल्क निर्धारित किया जाएगा।

सिविल सर्जन डॉ. मुकेश चौधरी ने बताया कि सभी सीएचसी केंद्रों को पत्र भेजा गया है और उन्हें डायलिसिस यूनिट के लिए साफ-सुथरा, वेंटिलेटेड और बिजली-पानी की व्यवस्था वाला स्थान जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है। प्रत्येक केंद्र को यह निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के अंदर प्रस्तावित स्थान की रिपोर्ट जिला कार्यालय में भेजें।

क्या कहते हैं अधिकारी

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं जिला अस्पताल में डायलिसिस की मौजूदा सुविधा पूरी तरह से ओवरलोड है। मरीजों को अपनी बारी के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर सुविधा उपलब्ध होने से न केवल भीड़ कम होगी, बल्कि मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिल सकेगा।

स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया

इस निर्णय का स्वागत करते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि यह एक सराहनीय कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज की सुविधाओं का अभाव लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। अब जब सरकार ने डायलिसिस जैसी महंगी और जीवन रक्षक सेवा को ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, तो इससे हजारों मरीजों को राहत मिलेगी।

रांची रोड निवासी संतोष कुमार, जिनके पिता को हर हफ्ते डायलिसिस की आवश्यकता होती है, ने बताया, “हमें हर तीसरे दिन जिला अस्पताल जाना पड़ता है। कई बार समय न मिलने पर पटना जाना पड़ता है, जिससे खर्च और परेशानी बढ़ जाती है। अब अगर हमारे ब्लॉक में यह सुविधा शुरू होती है, तो इससे बड़ा कोई उपकार नहीं होगा।”

विकास का नया संकेत

इस योजना को सरकार के ‘स्वस्थ गांव, समृद्ध देश’ अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब इलाज की मूलभूत सुविधाएं ग्रामीण स्तर तक पहुंचेंगी, तो बीमारी की जटिलता को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे न केवल मरीजों की जान बचेगी, बल्कि स्वास्थ्य पर होने वाला आर्थिक बोझ भी कम होगा।

तकनीकी और लॉजिस्टिक तैयारी

सभी सीएचसी प्रभारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि डायलिसिस सेंटर के लिए 24 घंटे बिजली और स्वच्छ पेयजल की अनिवार्यता होगी। इसके अलावा प्रशिक्षित टेक्नीशियन और स्टाफ नर्स की नियुक्ति के साथ-साथ बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था भी की जाएगी।

सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि जिन स्थानों पर मौजूदा भवन में पर्याप्त जगह नहीं है, वहां नई इमारत निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। साथ ही, अगले 3 महीनों के भीतर प्रथम चरण में कम से कम 5 सीएचसी में डायलिसिस सेवा शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

भविष्य की योजना

स्वास्थ्य विभाग की योजना है कि आने वाले एक वर्ष में सभी 21 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डायलिसिस सुविधा चालू हो जाए। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से विशेष बजट आवंटित किया गया है। साथ ही, प्रत्येक केंद्र को 2-3 डायलिसिस मशीनें और एक बैकअप जेनरेटर उपलब्ध कराया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह निर्णय न केवल चिकित्सा सुविधा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव है, बल्कि यह ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती देने की दिशा में एक मजबूत पहल भी है। यदि इसे समय पर और सही तरीके से लागू किया गया, तो यह जिले के हजारों मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित होगा।

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Author: gaytri

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