गोड्डा: सदर प्रखंड के ग्राम रेड़ी सहित पूरे जिले के लिए एक दुःखद समाचार है। क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी और गांधीवादी विचारधारा के संवाहक श्याम कांत झा का करीब 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले एक महीने से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।
सादगी और खादी के पर्याय
स्वर्गीय महेश्वर झा के पुत्र, श्याम कांत झा का जीवन सादगी और उच्च आदर्शों का मिश्रण था। उन्होंने आजीवन खादी वस्त्र धारण कर गांधीवादी सिद्धांतों का पालन किया। वे केवल विचारों तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने आत्मनिर्भरता को व्यवहार में उतारा।
स्वरोजगार की पहल: 90 के दशक में उन्होंने ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चरखा वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए, ताकि गांव का हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सके।
कौवा डैम निर्माण में ऐतिहासिक योगदान
क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। कौवा डैम के निर्माण में उन्होंने न केवल सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अपनी निजी भूमि भी इस परियोजना के लिए सहर्ष समर्पित कर दी। उनके इस त्याग के कारण ही आज क्षेत्र में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था संभव हुई, जल संरक्षण को बढ़ावा मिला तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
एक प्रभावशाली वक्ता और मधुर व्यक्तित्व
दिवंगत झा न केवल एक कर्मठ समाजसेवी थे, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता और मधुर कंठ के धनी भी थे। उनकी वाणी और सामाजिक चेतना ने सार्वजनिक जीवन में कई लोगों को प्रेरित किया। गांव के विकास और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ उनकी आवाज हमेशा गूंजती रहेगी।
उनके निधन पर क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे जिले के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।




