जेल के कैदियों को प्रशासन बना रही हुनरमंद, जुड़ेंगे आजीविका के मुख्यधारा से

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पाकुड़ : शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा मंडलकारा पाकुड़ के बंदियों का प्रोजेक्ट परिवर्तन के तहत 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ जिसमें सफल बंदी प्रशिक्षुओं को उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार और वरिष्ठ संकाय सह कार्यक्रम समन्वयक अमित कुमार बर्धन ने संयुक्त रूप से प्रमाणपत्र दिए।

उपायुक्त मनीष कुमार ने बंदियों को कौशल प्रशिक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का अधिकाधिक लाभ प्राप्त कर कैदियों को स्वावलंबी बनाकर मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। वर्तमान समय में हुनरमंद होना नितांत आवश्यक है। जेल से बाहर निकलने पर अपना हुनर का उपयोग कर स्वालंबी बन सकते हैं। पाकुड़ जिला की युवाओं और सखी मंडल की महिलाएं स्वरोजगार कर अच्छी आय प्राप्त कर रही हैं। उपायुक्त ने जेल में विभिन्न कौशल प्रशिक्षण को लगातार संचालित करने के लिए आरसेटी पाकुड़ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया।

पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने कहा कि कैदी कौशल प्रशिक्षण को प्राप्त कर अपना हुनर का विकास करें। उन्होंने विपणन की असीम संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे कार्यों की असीम संभावनाएं हैं और इन्हें भी सजा समाप्ति के बाद मुख्यधारा से जुड़ने का पूरा अधिकार है।

मंच का संचालन करते हुए आर्सेटी पाकुड़ के वरिष्ठ संकाय अमित कुमार बर्धन ने बंदियों को शुभकामनाएं देते हुए स्वरोजगार करने की सलाह दी। जीवन स्तर को सुधार करने में प्रशिक्षण के महत्त्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लाभुकों को इस प्रशिक्षण के साथ साथ विपणन, उद्यमी योग्यता, समय प्रबंधन, वित्तीय समावेशन, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंकिंग एवं बीमा आदि से संबंधित जानकारी दी गई।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रशिक्षक देवघर के विजय कुमार गुप्ता हैं।

आज के कार्यक्रम का मूल्यांकन नेशनल अकादमी ऑफ रूडसेटी द्वारा प्रतिनियुक्त अधिकारी अरुण नाथ तिवारी और मनोहर कुमार प्रभाकर द्वारा किया गया।

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Author: gaytri

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