उधवा (साहिबगंज): एक ओर सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ जैसे नारों के साथ बच्चों को स्कूल भेजने पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर उधवा प्रखंड के दक्षिण पलाशगाछी पंचायत में सरकारी तंत्र की नाक के नीचे एक नौनिहाल की शिक्षा को मजदूरी की भेंट चढ़ाया जा रहा है। पलाशगाछी बाजार के समीप बन रहे एक उप स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) के निर्माण कार्य में कक्षा तीन के छात्र से मजदूरी कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
₹400 की दिहाड़ी पर दांव पर भविष्य
वायरल वीडियो में दिख रहा बालक मात्र तीसरी कक्षा का छात्र है। पूछने पर उसने बताया कि वह पिछले चार दिनों से ₹400 प्रतिदिन की दर से यहां मजदूरी कर रहा है। सरकारी भवन निर्माण में इस तरह का सरेआम बाल श्रम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
बिना सूचना बोर्ड के महीने भर से चल रहा काम
स्थानीय ग्रामीणों ने योजना की पारदर्शिता पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं:
गायब सूचना बोर्ड: नियमानुसार किसी भी सरकारी योजना के स्थल पर योजना का नाम, लागत और मद का बोर्ड होना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं है।
अधिकारियों की अनुपस्थिति: ग्रामीणों का कहना है कि महीने भर से काम चल रहा है, लेकिन आज तक कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी निरीक्षण के लिए नहीं आया।
घटिया सामग्री का आरोप: राख की ईंटों का हो रहा प्रयोग
निर्माण कार्य में सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीण आक्रोशित हैं। बताया गया कि भवन निर्माण में एनटीपीसी की राख (Fly Ash) से बनी ईंटों का उपयोग किया जा रहा है।
“यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है, जहाँ लोग अपने घरों में भी इस ईंट का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में सरकारी भवन में इसका उपयोग भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।” — स्थानीय ग्रामीण
अधिकारियों का पक्ष: “हमें जानकारी नहीं”
इस मामले में संबंधित कनीय अभियंता (JE) और प्रखंड प्रशासन ने अनभिज्ञता जाहिर की है:
JE दिलीप कुमार साह: उन्होंने कहा कि नाबालिग से मजदूरी की जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि, उन्होंने राख वाली ईंटों के इस्तेमाल को विभागीय स्वीकृति मिलने की बात कही।
BDO-सह-CO जयंत कुमार तिवारी: उन्होंने स्पष्ट कहा कि “मामला संज्ञान में नहीं है। यदि नाबालिग से मजदूरी कराई जा रही है, तो यह दंडनीय अपराध है। जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”





