गोड्डा। नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर गोड्डा जिले में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। प्रत्याशी गलियों की खाक छान रहे हैं और वादों की झड़ी लगा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच गोड्डा नगर परिषद से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा महिलाएं हैं, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए मैदान में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है।
आंकड़ों का खेल: बराबरी की भागीदारी, पर उम्मीदवारी शून्य
गोड्डा नगर परिषद में मतदाताओं का गणित काफी दिलचस्प है। यहाँ पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच का अंतर बेहद मामूली है:
- कुल मतदाता: 34,196
- पुरुष मतदाता: 17,260
- महिला मतदाता: 16,936
- अंतर: केवल 324 पुरुष मतदाता अधिक हैं।
इतनी बड़ी संख्या में महिला वोटरों के बावजूद, अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे 11 उम्मीदवारों में सभी पुरुष हैं। यह स्थिति तब है जब पड़ोसी जिले पाकुड़ और दुमका में महिला प्रत्याशियों की लंबी कतार है।
आरक्षण बना ‘आधी आबादी’ की राह का रोड़ा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोड्डा नगर परिषद की सीट अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए आरक्षित होने के कारण समीकरण बदल गए हैं।
पूर्व में नूतन तिवारी (2008) और वेणु चौबे (2018) जैसी महिला नेताओं ने उपाध्यक्ष पद पर दमदार जीत दर्ज कर महिलाओं का दबदबा कायम किया था।
इस बार सीट आरक्षित होने के चलते ये कद्दावर महिला नेत्री चुनावी रेस से बाहर हो गईं, जिसका असर यह हुआ कि किसी भी अन्य महिला ने इस पद के लिए साहस नहीं दिखाया।
महागामा में स्थिति बेहतर
गोड्डा नगर परिषद के उलट, महागामा नगर पंचायत में महिलाओं की स्थिति कुछ बेहतर है। वहां अध्यक्ष पद के 12 उम्मीदवारों में से 3 महिलाएं अपनी किस्मत आजमा रही हैं। महागामा में कुल 19,655 मतदाता हैं, जिनमें 9,640 महिलाएं शामिल हैं।
मतदाताओं की खामोशी क्या रंग लाएगी?
वर्तमान में 11 पुरुष प्रत्याशी शहर की बेहतरी के दावे कर रहे हैं, लेकिन महिला मतदाताओं की समस्याओं और उनके प्रतिनिधित्व पर सवालिया निशान बना हुआ है। अब देखना यह है कि 11 पुरुषों के इस मुकाबले में गोड्डा की जनता किसके सिर पर जीत का ताज सजाती है।





