अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय के 100 साल पूरे, शताब्दी समारोह में सजेगा गौरवशाली इतिहास

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जिले के प्रख्यात शिक्षण संस्थानों में शुमार अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय, अयोध्यागंज बाजार अपनी गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा के 100 वर्ष पूरे करने की ओर है। विद्यालय का स्थापना दिवस हर वर्ष मनाया जाता है, लेकिन इस बार अवसर खास है। स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शताब्दी समारोह आयोजित करने की तैयारी चल रही है। यह समारोह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि उस विरासत को याद करने का अवसर होगा, जिसने क्षेत्र की कई पीढ़ियों को शिक्षा, संस्कार और दिशा दी है।

“अतीत की उपलब्धियों को नमन, वर्तमान की उपलब्धियों का उत्सव और भविष्य की नई पीढ़ी के लिए संकल्प” की भावना के साथ शताब्दी समारोह को यादगार बनाने की तैयारी की जा रही है। विद्यालय की गौरवशाली यात्रा को लेकर पूर्ववर्ती छात्रों और शिक्षकों में भी खासा उत्साह है।

जन्मदिन के दिन रखी गई थी शिक्षा की नींव

बताया जाता है कि विद्यालय की स्थापना स्वर्गीय रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपने प्रथम सुपुत्र स्वर्गीय अवधेश कुमार सिंह, पूर्व सांसद, कटिहार के जन्मदिवस के अवसर पर की थी। स्थापना के बाद विद्यालय ने धीरे-धीरे क्षेत्र में शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई।

विद्यालय के प्रथम प्रधानाध्यापक स्वर्गीय अशर्फी झा थे। उनके बाद राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित प्रख्यात विद्वान पंडित उग्र मोहन झा ने प्रधानाध्यापक का दायित्व संभाला। उनके कार्यकाल को विद्यालय के इतिहास का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। उनकी विद्वता और योगदान को देखते हुए उन्हें पांच-पांच वर्षों का तीन बार सेवा विस्तार भी दिया गया था। उनके जीवित पूर्ववर्ती छात्रों के अनुसार उस समय विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों को भी विशेष महत्व दिया जाता था।

टेस्ट में पास तभी फाइनल परीक्षा का फॉर्म, इसलिए आता था शानदार रिजल्ट

पूर्व छात्रों के अनुसार उस दौर में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था बेहद अनुशासित थी। हायर सेकेंडरी की फाइनल परीक्षा में शामिल होने से पहले विद्यालय स्तर पर छात्रों का टेस्ट लिया जाता था। टेस्ट में सफल विद्यार्थियों को ही फाइनल परीक्षा का फॉर्म भरने की अनुमति मिलती थी।

जो विद्यार्थी टेस्ट में सफल नहीं हो पाते थे, उनके लिए विद्यालय में विशेष कक्षाएं संचालित की जाती थीं। इसके बाद पूरक परीक्षा के माध्यम से उन्हें भी फाइनल परीक्षा की तैयारी कराई जाती थी। पूर्व छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की मेहनत और इस सख्त शैक्षणिक व्यवस्था का परिणाम था कि विद्यालय का परीक्षा परिणाम कई बार शत-प्रतिशत हुआ करता था।

जिस स्कूल के छात्र बने उसी स्कूल के शिक्षक

अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय की उपलब्धियों में यह भी खास है कि यहां पढ़ने वाले कई विद्यार्थी आगे चलकर इसी विद्यालय में शिक्षक बने। स्वर्गीय जनार्दन मंडल और स्वर्गीय सुरेश्वर प्रसाद सिंह जैसे पूर्व विद्यार्थियों ने इसी विद्यालय में शिक्षक के रूप में योगदान दिया और बाद में प्रधानाध्यापक पद तक पहुंचे।

पूर्व छात्रों के अनुसार यह विद्यालय के प्रति विद्यार्थियों के लगाव और यहां से मिले संस्कार का प्रमाण था। जिस विद्यालय में विद्यार्थियों ने शिक्षा की शुरुआत की, उसी विद्यालय में शिक्षक बनकर अगली पीढ़ी को शिक्षा देना संस्थान की मजबूत परंपरा को दर्शाता है।

पढ़ाई ही नहीं, फुटबॉल में भी बजता था डंका

विद्यालय की पहचान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रही। खेलकूद, खासकर फुटबॉल में भी अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय की अलग पहचान रही। पुराने विद्यार्थियों के अनुसार एक दौर में विद्यालय की फुटबॉल टीम जिले की प्रमुख टीमों में मानी जाती थी। मैदान में विद्यालय के खिलाड़ियों का प्रदर्शन आसपास के विद्यालयों के लिए भी चर्चा का विषय रहता था।

शताब्दी समारोह में याद होगी 100 साल की विरासत

अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय की 100 वर्षों की यात्रा शिक्षा, अनुशासन, खेलकूद और संस्कार की अनगिनत यादों से जुड़ी है। शताब्दी समारोह के माध्यम से विद्यालय के पूर्व शिक्षकों, विद्यार्थियों और उनसे जुड़ी उपलब्धियों को याद करने के साथ वर्तमान पीढ़ी को इस गौरवशाली विरासत से जोड़ने की योजना है।

“100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, अनगिनत सपनों की उड़ान—आइए, शताब्दी समारोह के माध्यम से इस विरासत को नई पहचान दें।” यह भाव इस ऐतिहासिक आयोजन की मूल भावना को सामने रखता है।

विद्यालय की शताब्दी केवल भवन और वर्षों की गिनती नहीं, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों की कहानी है, जिन्होंने यहां से शिक्षा लेकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई। दिसंबर में स्थापना दिवस के अवसर पर होने वाला आयोजन इस गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।

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Author: kelanchaltimes

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