एसीबी ने शराब घोटाला मामले में जेएसबीसीएल महाप्रबंधक समेत तीन को किया गिरफ्तार, अधिकारियों की संपत्ति होगी जाँच 

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रांची ।  भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई जारी है। शराब घोटाले से जुड़े लोगों की तलाश जारी है। आज एसीबी ने बहुचर्चित शराब घोटाले में झारखंड राज्य बिवरेज कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक, संचालन सह वित्त सुधीर कुमार, कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक वित्त सुधीर कुमार और मार्शन नोवेटिव सिक्युरिटी प्राइवेट लिमिटेड के के स्थानीय प्रतिनिधि नीरज सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। नीरज कुमार सिंह पर छत्तीसगढ़ की कंपनी के साथ मिल कर शराब घोटाले को अंजाम देने का आरोप है।
राज्य में शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत जांच कर रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का घेरा आरोपितों पर लगातार कस रहा है। मंगलवार, 20 मई को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव सह झारखंड राज्य विबरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के पूर्व प्रबंध निदेशक विनय कुमार चौबे व संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को एसीबी ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
अब इन दोनों अधिकारियों सहित विभाग के अन्य अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति का आकलन करने में भी एसीबी की टीम जुटी है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इनलोगों ने पद का दुरुपयोग करते हुए प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन की विहित प्रक्रिया व प्रविधानों को ताक पर रखा। इन अधिकारियों ने आपराधिक मिलीभगत से जालसाजी कर प्लेसमेंट एजेंसियों को लाभ पहुंचाया। इससे राज्य सरकार को लगभग 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा। 

अब एसीबी इन अधिकारियों से यह हिसाब लेगा कि जालसाजी से हुई उगाही के रुपये किसके हिस्से में कितना बंटा। नुकसान केवल 38 करोड़ रुपये का है या राशि इससे अधिक है। एसीबी को प्रथम दृष्टया छानबीन में यह पता चला है कि उत्पाद विभाग में रहते हुए इन अधिकारियों ने प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालकों के साथ मिलीभगत कर बड़ी मात्रा में जालसाजी की है।  जालसाजी की राशि एक अरब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। जिन प्लेसमेंट एजेंसियों को इन अधिकारियों ने लाभ पहुंचाया था, उन्हें बाद में नियम व शर्तों का अनुपालन नहीं करने पर राज्य सरकार ने ब्लैकलिस्ट करते हुए उनकी बैंक गारंटी को जब्त किया था।

हालांकि, उसके बाद भी जिन प्लेसमेंट एजेंसियों का चयन हुआ, उनमें में भी कइयों के साथ इन अधिकारियों की मिलीभगत हुई। बाद में भी हुए खेल की जानकारी के लिए एसीबी के अधिकारी छानबीन में जुटे हुए हैं।  एसीबी के अधिकारियों की टीम गिरफ्तार विनय चौबे व गजेंद्र सिंह के आय-व्यय का ब्यौरा भी खंगालने में जुटी है। करीब दस वर्षों के चेक पीरियड में उन्हें वैध स्रोत से कितने आय हुए और इस अवधि में उन्होंने कितना व्यय किया, इसका भी डेटा खंगाला जा रहा है।

जल्द ही एसीबी के अधिकारी विनय चौबे व गजेंद्र सिंह के बैंक खातों को खंगालेंगे, जिससे उनके खाते में आए धन का पता लगा सकें। उनके पैनकार्ड, उनकी सरकार को घोषित की गई चल-अचल संपत्ति का भी अध्ययन करेंगे। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि इस अवधि में इन अधिकारियेां ने कहां-कहां चल-अचल संपत्ति अर्जित की है।       

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