जिले के कुरसेला नगर पंचायत और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों के चूल्हे डूब गए हैं। ऐसे में कई परिवार चूड़ा-सत्तू खाकर गुजारा करने को मजबूर हैं। प्रखंड के करीब 38 वार्ड बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं।
बाढ़ और जलजमाव के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए प्रशासन ने 16 विद्यालयों को अस्थायी रूप से नजदीकी सुरक्षित स्कूलों में शिफ्ट किया है। वहीं, प्रभावित परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने 67 जगहों पर सामुदायिक किचन शुरू किए हैं, जहां बाढ़ पीड़ितों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
बाढ़ के पानी में चापाकल डूबने से कई इलाकों में पेयजल संकट भी गहरा गया है। इसे देखते हुए पीएचईडी की ओर से 10 से 15 स्थानों पर अस्थायी चापाकल और अस्थायी शौचालय बनाए जा रहे हैं। वहीं, जलमग्न सड़कों और गलियों से लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से नावों का परिचालन कराया जा रहा है।
सीओ अनुपम कुमारी, बीडीओ कुमारी प्रियवंदा और चिकित्सा प्रभारी डॉ. अमरलाल समेत प्रशासनिक टीम लगातार प्रभावित इलाकों का जायजा ले रही है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने, स्वास्थ्य जांच और बचाव कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जारी रखा गया है।





