पाकुड़। ग्रामीण क्षेत्र की किशोरियों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्थानीय स्वयंसेवी संस्था फेस की ओर से चापाड़ांगा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में विशेष संवाद एवं जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से पहुंचीं किशोरियों ने पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं, सवाल और रोजमर्रा से जुड़ी समस्याएं खुलकर रखीं।
कार्यक्रम में पाकुड़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कुमार गौरव ने किशोरियों के साथ सीधे संवाद किया। इस दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा, महिला सुरक्षा, बाल अधिकार, साइबर अपराध और भविष्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पुलिस अधिकारी के सामने किशोरियों ने बेझिझक रखे सवाल
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि किशोरियों को केवल श्रोता की भूमिका तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें अपनी बात रखने और सवाल पूछने का पूरा अवसर दिया गया। किशोरियों ने व्यक्तिगत सुरक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, बाल अधिकार और साइबर अपराध से जुड़े सवाल सीधे पुलिस अधिकारी के समक्ष रखे।
एसडीपीओ कुमार गौरव ने किशोरियों की जिज्ञासाओं और सवालों का सरल एवं व्यवहारिक तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की असुरक्षा, परेशानी या अनुचित व्यवहार को चुपचाप सहन करने के बजाय समय रहते संबंधित अधिकारियों अथवा भरोसेमंद लोगों से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने किशोरियों को जागरूक, आत्मनिर्भर और सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित किया।
जागरूकता को बताया सुरक्षा की पहली सीढ़ी
संवाद के दौरान सुरक्षा के लिए जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया गया। खासकर डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर अपराध से बचाव की जानकारी किशोरियों के लिए जरूरी है।
किशोरियों को साइबर अपराध से बचने, निजी जानकारी और डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल सहायता लेने के प्रति जागरूक किया गया। इसके साथ ही बाल अधिकार और महिला सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी भी साझा की गई।
शिक्षा को बनाया जा रहा सशक्तिकरण का आधार
कार्यक्रम में फेस की सचिव ऋतु पांडेय ने संस्था की ओर से बालिका शिक्षा, किशोर-किशोरी सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बालिका शिक्षण, किशोर-किशोरी विकास एवं सशक्तिकरण तथा एसबीआईएफ-आईएलएलएम के तहत संचालित गतिविधियों के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई छोड़ चुकी और अनियमित रूप से विद्यालय जाने वाली बालिकाओं को आधारभूत शिक्षा से जोड़ने के साथ समुदाय के विभिन्न वर्गों को शिक्षा, जागरूकता और कौशल विकास से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण किशोरियों को अपने भविष्य से जुड़े फैसले स्वयं लेने में सक्षम बनाना है।
पुलिस और किशोरियों के संवाद से टूटी झिझक
ग्रामीण क्षेत्र की किशोरियों के लिए पुलिस अधिकारी के सामने अपनी बात रखना कई बार सहज नहीं होता। हालांकि, कार्यक्रम में खुले सवाल-जवाब के माहौल ने किशोरियों की झिझक कम की। उन्होंने अपनी जिज्ञासाएं और समस्याएं खुलकर रखीं और पुलिस अधिकारी ने सहजता के साथ उनके सवालों का जवाब दिया।
कार्यक्रम के माध्यम से किशोरियों को यह भरोसा मिला कि किसी परेशानी की स्थिति में वे अपनी बात जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचा सकती हैं। कानून और अधिकारों से जुड़ी जानकारी को सीधे किशोरियों तक पहुंचाने से उन्हें अपनी सुरक्षा और अधिकारों को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला।
किशोरियों की सक्रिय भागीदारी की हुई सराहना
एसडीपीओ कुमार गौरव ने कार्यक्रम में किशोरियों के उत्साह, सक्रिय सहभागिता और संवाद के दौरान उनकी भागीदारी की सराहना की। उन्होंने भविष्य में भी आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में फेस के सदस्यों मेहबूब आलम, निकिता झा, देवज्योति बनर्जी, शहादत हुसैन, शमीमा, रिजवाना, अशरफ, हाफिजा और अकमल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
मौके पर संस्था की सचिव ऋतु पांडेय, रतन कुमार सिंह उर्फ पिंटू सिंह, डॉक्टर सोवेंडू मंडल, शहादत हुसैन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
संदेश स्पष्ट—डर नहीं, जानकारी जरूरी
कार्यक्रम ग्रामीण किशोरियों के लिए महज एक जागरूकता सत्र नहीं रहा, बल्कि उनके भीतर सवाल पूछने, अपनी बात रखने और अपने अधिकारों को समझने का अवसर भी बना। शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अपने अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी रखने वाली किशोरी अपने भविष्य को लेकर अधिक मजबूत और जागरूक निर्णय ले सकती है।
ग्रामीण समाज में इस तरह के संवाद लगातार आयोजित होने से किशोरियों और प्रशासन के बीच भरोसा बढ़ने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।




