भागलपुर। जिले में गंगा और कोसी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति पर निगरानी तेज कर दी है। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए भोजन, नाव, मानवबल और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
22 अगस्त 2026 से भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बढ़ना शुरू हुआ। इसके बाद 24 अगस्त की रात राघोपुर-काजीकोरैया बांध टूटने से खरीक अंचल की राघोपुर पंचायत प्रभावित हुई। प्रभावित लोगों के लिए 24 अगस्त से सामुदायिक रसोई शुरू की गई, जिसके जरिए अब तक 62,698 आपदा प्रभावित लोगों को भोजन कराया जा चुका है।
राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध में तेज कटाव और अंडरमाइनिंग के कारण करीब 30 मीटर हिस्से में क्षति हुई थी। 1 सितंबर की सुबह दोबारा क्षति होने के बाद अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम कटाव बढ़ गया और कुल ब्रीच करीब 400 मीटर तक पहुंच गया। बचाव कार्य के लिए मौके पर 2,800 मेगा जियो बैग और 1.25 लाख बालू भरे बोरे उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 2 लाख अतिरिक्त बोरे निकटवर्ती प्रमंडलों से भेजे जा रहे हैं। राहत-बचाव कार्य में 45 ट्रैक्टर, 2 पोकलेन, 3 जेसीबी, 6 नाव और करीब 85 श्रमिक लगाए गए हैं।
3 सितंबर 2026 को गंगा का जलस्तर भागलपुर में 33.50 मीटर, कहलगांव में 31.87 मीटर, सुल्तानगंज में 35.92 मीटर, इस्माईलपुर-बिंदटोली में 32.18 मीटर और राघोपुर में 33.15 मीटर दर्ज किया गया। सभी स्थानों पर जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई। वहीं कोसी नदी के कुरसेला, मदरौनी और चोरहर में भी जलस्तर बढ़ा है। वर्तमान में खरीक अंचल की एक पंचायत के 5 गांवों में 1,005 परिवार यानी 5,011 लोग प्रभावित हैं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों के रूप में इस्माईलपुर और नवगछिया अंचल के इलाकों को भी चिन्हित किया गया है।
जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए SDRF और NDRF की टीमों को तैनात किया है। प्रभावित क्षेत्रों में नाव, मानवबल और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से बाढ़ प्रभावित इलाकों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने और आपदा प्रबंधन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना देने को कहा गया है।




