लखीसराय के वरिष्ठ सीपीआई नेता और पूर्व जिला सचिव कॉमरेड मोती साह की पत्नी सावित्री देवी (65) का निधन हो गया है। वे पिछले 35 वर्षों से बीमारी से जूझ रही थीं, बावजूद इसके उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का हमेशा ख्याल रखा। वे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके अंतिम संस्कार में जिला सचिव शंकर राम, नगर परिषद अध्यक्ष अरविंद पासवान सहित सैकड़ों गणमान्य लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कम्युनिस्ट विचारधारा की समर्थक सावित्री देवी का निधन, लखीसराय में शोक की लहर
लखीसराय जिले के वरिष्ठ सीपीआई (CPI) नेता और पूर्व जिला सचिव कॉमरेड मोती साह की धर्मपत्नी सावित्री देवी का निधन हो गया है। 65 वर्षीय सावित्री देवी का जाना परिवार और राजनीतिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। वे जीवन भर कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रति समर्पित रहीं और कॉमरेड मोती साह के साथ-साथ पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का उन्होंने सदैव एक अभिभावक की तरह ध्यान रखा।
संघर्षपूर्ण रहा जीवन, बीमारी को भी दी मात
सावित्री देवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा। पिछले 35 वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। परिवार के सदस्यों और परिचितों का कहना है कि उन्होंने कभी भी अपनी बीमारी का अहसास किसी को नहीं होने दिया और पूरी संजीदगी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। वे अपने पीछे एक पुत्र, एक पुत्री, तीन पौत्र, एक पौत्री, तीन नाती और एक नतनी समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
सावित्री देवी के निधन की सूचना मिलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोगों का उनके आवास पर तांता लग गया। अंतिम विदाई के दौरान सीपीआई जिला सचिव शंकर राम, जिला सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड रंजीत कुमार अजीत, शिवदानी सिंह बच्चन, दिनकर कुमार, सुनील कुमार और रौशन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
प्रमुख हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि देने वालों में जदयू के अधिवक्ता घनश्याम प्रसाद यादव, नगर परिषद अध्यक्ष अरविंद पासवान, सुधीर यादव, दीपक वर्मा के अलावा माले के संजय अनुरागी, रणधीर कुमार, सुधीर पासवान, अभिषेक पटेल, धीरज मुखिया और रामपाल मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग शामिल थे। सभी ने सावित्री देवी को एक आदर्श महिला और कम्युनिस्ट परिवार की मजबूत स्तंभ बताते हुए उनके प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उनका निधन लखीसराय के राजनीतिक और सामाजिक दायरे में एक खालीपन छोड़ गया है।





