भागलपुर। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से मची त्रासदी को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से पीएम केयर्स फंड के तहत देश के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में भागलपुर सदर अस्पताल परिसर में भी मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। प्लांट के बाहर लगे बोर्ड के अनुसार इसकी फंडिंग पीएम केयर्स से हुई, जबकि इसे एलएंडटी ने क्रियान्वित किया और डीआरडीओ ने डिजाइन एवं विकसित किया।
इस प्लांट को स्थापित करने का उद्देश्य अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर मरीजों को निर्बाध आपूर्ति उपलब्ध कराना और बाहरी स्रोतों से ऑक्सीजन मंगाने पर निर्भरता कम करना था। लेकिन वर्तमान स्थिति में इस उद्देश्य के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। सदर अस्पताल परिसर में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट के संरक्षित शेड के गेट पर ताला लगा हुआ है। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार नए मॉडल अस्पताल भवन में बिछाई गई ऑक्सीजन पाइपलाइन का कनेक्शन अब तक इस प्लांट से नहीं जोड़ा गया है।
सबसे बड़ा सवाल जंबो ऑक्सीजन सिलेंडरों को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्लांट से जंबो सिलेंडरों की रिफिलिंग नहीं हो रही है। जरूरत पड़ने पर अस्पताल को सिलेंडर बाहर से भरवाने पड़ रहे हैं। यानी एक ओर अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए प्लांट स्थापित है, वहीं दूसरी ओर ऑक्सीजन सिलेंडरों की रिफिलिंग पर सरकारी राशि खर्च हो रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि प्लांट की क्षमता का इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसे अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्था से जोड़ने में अब तक क्या बाधा है।
प्लांट के समीप लगे सूचना बोर्ड पर सदर अस्पताल में विभिन्न सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। वहीं मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट के बोर्ड पर पीएम केयर्स, एलएंडटी और डीआरडीओ से जुड़ी जानकारी अंकित है। सदर अस्पताल का समय-समय पर जिलाधिकारी अलंकृता पांडे समेत वरीय प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाता रहा है। बीते दिनों भी सदर अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। इसके बावजूद ऑक्सीजन प्लांट को अस्पताल की पाइपलाइन से जोड़कर नियमित संचालन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मणिभूषण झा ने बताया कि नए मॉडल अस्पताल भवन के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए पाइपलाइन लगाई गई है, लेकिन उसका कनेक्शन अभी ऑक्सीजन प्लांट से नहीं जोड़ा गया है। हाल के दिनों में बीएमएसआईसीएल के जीएम द्वारा भी स्थल का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के बाद कनेक्शन का काम पूरा कर प्लांट को जल्द संचालित किए जाने की संभावना है।
अब सवाल यही है कि कोरोना जैसी आपदा में मरीजों की जिंदगी बचाने के उद्देश्य से लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट कब तक ताले में बंद रहेगा और कब सदर अस्पताल के मरीजों को इसका वास्तविक और पूर्ण लाभ मिल सकेगा। साथ ही, जब तक प्लांट पूरी तरह चालू नहीं होता, तब तक बाहर से जंबो सिलेंडर भरवाने पर हो रहे सरकारी खर्च और उसकी आवश्यकता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।





