साहिबगंज जिले में दो महत्वपूर्ण घटनाओं ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर ले जाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं बरहेट प्रखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच तेज कर दी गई है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम दस्तावेजों की जांच कर संभावित अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है।
साहिबगंज: जिले में बुधवार को दो अलग-अलग मामलों ने प्रशासन और पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी। एक ओर मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले जाने का मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर बरहेट प्रखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज कर दी गई है।
मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने थाना में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि फूलोलक्ष्मी निवासी जमील अंसारी, पिता खलील अंसारी, उनकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर और शादी का प्रलोभन देकर अपने साथ ले गया है। शिकायत के आधार पर मिर्जाचौकी थाना में कांड संख्या 52/26 दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और युवती की बरामदगी तथा आरोपी की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
इधर, बरहेट प्रखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत कथित फर्जीवाड़े के मामले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि योजना का लाभ पात्रता मानकों के विपरीत कुछ कम उम्र के लोगों को दिलाया गया। इसके लिए कथित रूप से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र तथा आधार कार्ड में उम्र संबंधी हेरफेर का सहारा लिया गया। मामले में सरकारी राशि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय टीम में उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा, अपर समाहर्ता गौतम भगत और जिला पंचायती राज पदाधिकारी अनिल कुमार शामिल हैं। टीम ने बरहेट प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ अंशु कुमार पांडे की उपस्थिति में पंचायत सचिवों तथा संबंधित कर्मचारियों के साथ बैठक की और विभिन्न अभिलेखों की जांच की।
करीब दो घंटे तक चली जांच के दौरान अधिकारियों ने लाभुकों की सूची, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज तथा अन्य तकनीकी अभिलेखों का सत्यापन किया। संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई। अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने और रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए।






