हरिद्वार (जीतेन्द्र कुमार सिन्हा)। कला, साहित्य और संस्कृति के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए समर्पित थावे विद्यापीठ की ओर से आगामी 24 और 25 अक्टूबर को हरिद्वार में दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया जाएगा। अधिवेशन में देश-विदेश से साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार, संस्कृति प्रेमी, विषय विशेषज्ञ, समाजसेवी और राष्ट्रप्रेमी शामिल होंगे।
हरिद्वार अधिवेशन के स्थानीय संयोजक एवं विद्यापीठ के उप कुलसचिव डॉ. गिरधारी लाल अग्रवाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि देश के लगभग आधा दर्जन राज्यों के करीब 50 शहरों से प्रतिभागी अधिवेशन में पहुंचेंगे। विदेशी प्रतिभागियों की भी भागीदारी होगी।
अधिवेशन के पहले दिन निबंधन के बाद भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद तीन तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें हिंदी भाषा, पर्यावरण और युवा वर्ग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। रात में कलाकारों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
दूसरे दिन सुबह गायन-वादन के साथ प्रभात फेरी निकाली जाएगी। इसके बाद एक तकनीकी सत्र और फिर मुक्त सत्र का आयोजन होगा। मुक्त सत्र में राष्ट्रीय एवं सामाजिक हित में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विभिन्न क्षेत्रों के चयनित प्रतिभागियों को सम्मानोपाधियां प्रदान की जाएंगी। कार्यक्रम के समापन के बाद रात्रि में कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
अधिवेशन को सफल बनाने के लिए विद्यापीठ के पदाधिकारी एवं सदस्य तैयारियों में जुटे हैं। कुलाधिपति महामंडलेश्वर (डॉ.) स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक और प्रतिकुलपति डॉ. जे. बी. पांडेय के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में कुलसचिव डॉ. पी. एस. दयाल यति, उप कुलसचिव डॉ. गिरधारी लाल अग्रवाल समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य कार्यक्रम की तैयारियों में लगे हैं।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि विद्यापीठ की स्थापना काल से ही साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों एवं तीर्थस्थलों में वार्षिक अधिवेशन आयोजित करने की परंपरा रही है। इससे पहले चित्रकूट, अयोध्या, वाराणसी और जगन्नाथ पुरी में अधिवेशन आयोजित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में इस बार गंगा अवतरण स्थल और प्रसिद्ध तीर्थ नगरी हरिद्वार को अधिवेशन के लिए चुना गया है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में ऐसे आयोजन व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का अनुभव कराने के साथ सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव मजबूत करते हैं। गंगा तट पर आयोजित होने वाला यह अधिवेशन विद्यापीठ की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि पंजीकृत एवं चयनित प्रतिभागियों के आवासन और भोजन की व्यवस्था विद्यापीठ की ओर से की जाएगी। दीक्षांत समारोह में शामिल होने वाले प्रतिभागियों के लिए ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया है। पुरुष प्रतिभागियों को सफेद कुर्ता-पायजामा, केसरिया बंडी और लोंगो वाली पगड़ी, जबकि महिला प्रतिभागियों को केसरिया बॉर्डर वाली सफेद साड़ी और लोंगो वाली पगड़ी पहननी होगी। पगड़ी, लोंगो, स्कार्फ, बैच और पट्टा विद्यापीठ की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा।





