घाटशिला। झारखंड में बांग्ला भाषा, संस्कृति और बांग्लाभाषी समाज के अधिकारों को लेकर राज्य सरकार और बांग्लाभाषी समुदाय के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। हाल ही में राज्य के शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू द्वारा झारखंड विधानसभा में बांग्ला अकादमी के गठन की मांग पर दिए गए जवाब के बाद बांग्लाभाषी समाज में नाराजगी है। इसके विरोध में झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति ने निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
मंगलवार को घाटशिला के दाहिगोड़ा स्थित कालजयी साहित्यकार विभूति बाबू के ऐतिहासिक आवास ‘गौरीकुंज’ में समिति की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। समिति के पदाधिकारियों ने बांग्ला अकादमी के गठन की मांग को लेकर सरकार की नीति और रवैये पर सवाल उठाए। केंद्रीय संयुक्त सचिव तापस चटर्जी ने कहा कि यह खुशी और गर्व की बात है कि विधानसभा में जनप्रतिनिधियों ने बांग्लाभाषियों की जायज मांग को मजबूती से उठाया है। समिति ने इस मांग का समर्थन करने वाले विधायकों के प्रति आभार भी जताया।
समिति ने कहा कि यदि सरकार अपने फैसले पर तत्काल पुनर्विचार नहीं करती और बांग्ला अकादमी के गठन की प्रक्रिया शुरू नहीं करती है, तो झारखंड के विभिन्न हिस्सों में बांग्लाभाषी समाज आंदोलन करने को बाध्य होगा। समिति ने राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।
समिति ने वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उस समय झारखंड में बांग्लाभाषियों की संख्या 28 लाख से अधिक दर्ज की गई थी। समिति का कहना है कि वर्तमान में यह संख्या और बढ़ चुकी है। बांग्ला समाज ने राज्य के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में अपने ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भाषा के संरक्षण, शोध और संवर्धन के लिए बांग्ला अकादमी का गठन आवश्यक है।
प्रेस वार्ता में केंद्रीय संयुक्त सचिव तापस चटर्जी के साथ शिल्पी सरकार, शिखा रक्षित, प्रदीप भद्र, सोमा सरकार, संजय सिन्हा, साधुचरण पाल, साधना पाल सहित समिति के कई प्रमुख सदस्य और बांग्लाभाषी प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।





