भागलपुर/कहलगांव। प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय की गौरवशाली धरोहर को पुनः जीवंत करने के उद्देश्य से प्रस्तावित ‘विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय’ के निर्माण में हो रही देरी के बीच अब इसके अस्थायी संचालन की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसी दिशा में पहल करते हुए विधायक ई० शुभानंद मुकेश ने बिहार के महामहिम राज्यपाल को मांग पत्र सौंपा है।
पत्र के माध्यम से उन्होंने आग्रह किया है कि जब तक अंतीचक में विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक विश्वविद्यालय का प्रशासनिक संचालन और पठन-पाठन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के परिसर से अस्थायी रूप से अविलंब शुरू किया जाए।
भूमि हस्तांतरण पूरा, ₹500 करोड़ का प्रावधान
ई० शुभानंद मुकेश ने पत्र में बताया कि अंतीचक में विश्वविद्यालय निर्माण के लिए चिन्हित करीब 220 एकड़ भूमि के बिहार सरकार को हस्तांतरण की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹500 करोड़ का प्रारंभिक बजट भी आवंटित किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि तमाम कागजी प्रक्रियाएं और जरूरी प्रशासनिक स्वीकृतियां पूरी होने के बावजूद विश्वविद्यालय में पठन-पाठन शुरू नहीं हो पाना क्षेत्र के युवाओं के साथ अन्याय है।
छात्रहित में शीघ्र संचालन की आवश्यकता
विधायक ने कहा कि स्थायी परिसर के निर्माण में अभी लंबा समय लग सकता है। ऐसे में छात्रहित को ध्यान में रखते हुए अस्थायी परिसर से शैक्षणिक सत्र शुरू करना बेहद जरूरी है। यदि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के उपलब्ध बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए कक्षाएं और प्रशासनिक कार्य शुरू कर दिए जाएं, तो अंग क्षेत्र और बिहार के युवाओं का बहुमूल्य शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शीघ्र संचालन से उच्च शिक्षा के लिए स्थानीय छात्रों को दूसरे शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। साथ ही ऐतिहासिक विक्रमशिला की शैक्षणिक प्रासंगिकता को भी पुनः स्थापित करने में मदद मिलेगी।
ई० शुभानंद मुकेश ने राज्यपाल से छात्रहित और क्षेत्र के शैक्षणिक विकास को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।





