पाकुड़िया : प्रखंड क्षेत्र में सोमवार रात गणेश चतुर्थी का पर्व पारंपरिक श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न पूजा पंडालों और घरों में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। शाम होते ही पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी और पूरा क्षेत्र ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंज उठा।
निराहार रहकर व्रतियों ने किया उपवास
गणेश चतुर्थी के अवसर पर महिला और पुरुष व्रतियों ने दिनभर निराहार रहकर उपवास रखा। शाम और रात में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान गणेश की विशेष महाआरती की गई। इसके बाद भगवान गणेश को मोदक, लड्डू समेत विभिन्न प्रकार के प्रसाद का भोग अर्पित किया गया। पूजा में शामिल व्रतियों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गणेश चतुर्थी की व्रत कथा का श्रवण किया।
चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूरा किया उपवास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत कथा श्रवण के बाद व्रतियों ने चंद्र दर्शन कर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित किया। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की गई। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा-अर्चना पूरी करने के बाद व्रतियों ने अपना उपवास समाप्त किया।
संकटों को दूर करने वाला माना जाता है गणेश चतुर्थी का व्रत
क्षेत्र के पुरोहित पंडित संतोष तिवारी ने गणेश चतुर्थी के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गणेश चतुर्थी का व्रत संकटों को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और बुद्धि का वास होता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। विभिन्न स्थानों पर देर रात तक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान भक्तिमय वातावरण में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।




