पटना. बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने सदाकत आश्रम में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में राज्य की शिक्षा व्यवस्था और हजारों वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और वित्तरहित शिक्षक वर्षों से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राजेश राम ने कहा कि 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने बिहार के दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वित्तरहित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के समायोजन और बहाली की पहल की थी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना था।
उन्होंने कहा कि आज भी हजारों वित्तरहित शिक्षक विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा की ज्योति जला रहे हैं, लेकिन वर्तमान सरकार उनके योगदान और समस्याओं के प्रति उदासीन बनी हुई है। राजेश राम ने सरकार से वित्तरहित शिक्षकों का शोषण बंद करने, उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष डॉ. संजय यादव ने कहा कि वित्तरहित शिक्षा नीति की समाप्ति और सभी वित्तरहित कॉलेजों के समायोजन की मांग को लेकर कांग्रेस सेवादल की ओर से राज्य के विभिन्न जिलों में एकदिवसीय धरना आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि यह अभियान 30 जून को अरवल से शुरू हुआ और 5 सितंबर को पटना के गांधी मैदान से पदयात्रा ‘कफन यात्रा’ के रूप में शहीद स्थल सप्तमूर्ति विधानसभा तक पहुंचेगा।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस सेवादल के प्रभारी अफरोज खान, पटना जोनल अध्यक्ष अहमद राजा खान, कोषाध्यक्ष आशुतोष रंजन, महिला अध्यक्ष रुचि सिंह, विपिन झा सहित बिहार प्रदेश इंटरमीडिएट वित्त रहित संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष सुमित्रा यादव, उपाध्यक्ष अखिलेश्वर सिंह, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. डॉ. रामनरेश प्रसाद, बिहार राज्य संबद्ध शिक्षक संगठन के अध्यक्ष रण विजय कुमार सिंह, रामसुंदर दास महिला कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय सिंह और जलान कॉलेज के प्रो. मोहम्मद असलम मौजूद रहे।





