भागलपुर। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने केंद्र सरकार द्वारा ईपीएफ अंशदान के लिए वेतन स्लैब को बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने के निर्णय को मजदूर-कर्मचारी आंदोलन की जीत बताया है। ऐक्टू के राज्य सचिव एवं भाकपा (माले) के राज्य कमिटी सदस्य मुकेश मुक्त ने वेतन स्लैब बढ़ाए जाने पर केंद्र सरकार द्वारा वाहवाही लूटे जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से कर्मचारी और नियोक्ता को वेतन से अधिक राशि का अंशदान करना पड़ेगा, जबकि इसमें केंद्र सरकार की कोई भागीदारी नहीं है। ऐसे में सरकार किस बात की वाहवाही लूट रही है।
मुकेश मुक्त ने कहा कि वेतन स्लैब बढ़ाने की मांग मजदूरों, कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों के लंबे समय से जारी आंदोलन का हिस्सा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि पीएफ राशि पर फिलहाल मिल रहे 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बढ़ाकर 10.5 प्रतिशत किया जाना चाहिए और इसमें सरकार का योगदान सुनिश्चित होना चाहिए।
उन्होंने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये करने की भी मांग की। साथ ही लगभग 31 लाख निष्क्रिय ईपीएफ खातों में जमा दावा रहित 9,330 करोड़ रुपये की राशि को जीवित पेंशनधारियों में वितरित करने की मांग उठाई।
कॉमरेड मुकेश मुक्त ने कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि सरकारी एवं निजी एजेंसियों के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर कार्यरत संविदा और ठेका कर्मियों की कुल संख्या कितनी है तथा इनमें से कितने कर्मचारी ईपीएफ और ईएसआई के दायरे में आते हैं। उन्होंने राज्य में स्कीम वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ से वंचित किए जाने पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि राज्य में आशा, आंगनबाड़ी और विद्यालय रसोइयों समेत लगभग 5.25 लाख स्कीम वर्कर्स कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें दशकों से ईपीएफ और ईएसआई जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि स्कीम वर्कर्स को ईपीएफ और ईएसआई का लाभ देने के लिए कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों हिस्सों का अंशदान सरकार की ओर से दिया जाए और सभी स्कीम वर्कर्स को इन सामाजिक सुरक्षा लाभों की गारंटी दी जाए।




