पटना: जमुई की नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बिहार राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से पीड़िता की तस्वीर साझा किए जाने का आरोप लगाते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की।
राजद की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि नाबालिग पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रकाशित होने के बावजूद संबंधित एजेंसियों की ओर से कार्रवाई नहीं की गई। प्रतिनिधिमंडल ने POCSO एक्ट 2012 की धारा 23, किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 74 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 72 के तहत कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इस मामले में पटना के सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है।
ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ मामले का भी हवाला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों की पीड़िताओं की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने और नाम-पता समेत ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने पर जोर दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग पीड़िता की पहचान उजागर किए बिना की जानी चाहिए।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि आयोग इस मामले पर विचार करेगा कि इस संबंध में वह क्या कार्रवाई कर सकता है। आयोग से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में डॉ. अनवर आलम, डॉ. एज्या यादव, डॉ. चक्रपाणि हिमांशु, मदन शर्मा, चित्तरंजन गगन और निर्भय अंबेडकर शामिल थे। वहीं, महिला आयोग से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में मधु मंजरी, आभा लता, प्रो. गीता यादव, रबिया खातून, सुनीता कुशवाहा, विजय लक्ष्मी, प्रभावती देवी मांझी और अर्चना कुमारी शामिल रहीं।





