गोड्डा। जिला मुख्यालय स्थित स्थायी लोक अदालत ने आपसी सुलह और मध्यस्थता की मिसाल पेश करते हुए एक पुराने ऋण विवाद को सफलतापूर्वक समाप्त करा दिया है। अदालत की पहल पर झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक (लुकलुकी शाखा) और ऋण धारक के बीच एक सम्मानजनक समझौता हुआ।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विजय कुमार पांडेय, सदस्य दिनकर कुमार एवं डॉ. नीरज कुमार की खंडपीठ ने वाद संख्या 21/26 की सुनवाई की। मामले में बैंक प्रबंधन की ओर से शाखा प्रबंधक कुमारी पूनम और ऋण धारक रमेश मंडल ने अपना पक्ष रखा।
अदालत की सूझबूझ और दोनों पक्षों की सहमति के बाद, 1,80,000 रुपये के कुल बकाया ऋण के विरुद्ध मात्र 1,25,000 रुपये पर अंतिम समझौता तय किया गया। इस फैसले से ऋण धारक को सीधा 55 हजार रुपये का वित्तीय लाभ मिला।
समझौते के तहत निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए ऋण धारक रमेश मंडल ने मौके पर ही 35,000 रुपये की नकद राशि जमा कर आधिकारिक पावती रसीद प्राप्त की। शेष राशि का भुगतान अगले दो महीनों के भीतर करने का शपथ पत्र दिया गया।
समझौते के बाद अदालत द्वारा औपचारिक ‘अवार्ड’ तैयार किया गया। वर्षों से चले आ रहे इस विवाद के निस्तारण पर बैंक प्रबंधन और ऋण धारक दोनों ने प्रसन्नता व्यक्त की और राहत की सांस ली।
अदालत के सदस्यों ने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य मुकदमेबाजी को कम करना और आम जनता को त्वरित न्याय प्रदान करना है।




