घाटशिला: झारखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एनआईटी जमशेदपुर और सोना देवी विश्वविद्यालय के बीच शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से रिसर्च प्रोजेक्ट, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP), राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, छात्र एवं शिक्षक विनिमय, समर इंटर्नशिप, औद्योगिक भ्रमण, प्लेसमेंट गतिविधियां और उद्योग–शिक्षा सहयोग से जुड़े कार्यक्रम संचालित करेंगे। साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), डिजिटल तकनीक और गुणवत्ता सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एनआईटी जमशेदपुर, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, जबकि सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला झारखंड सरकार द्वारा अधिनियमित एवं यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 2(एफ) के तहत मान्यता प्राप्त बहुविषयी विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय में वर्तमान में 13 स्कूलों के अंतर्गत 66 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
यह एमओयू प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और दोनों संस्थानों की सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इस साझेदारी से विद्यार्थियों को आधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, उद्योग आधारित प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख अवसरों का लाभ मिलेगा।
विश्वविद्यालय की सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता विद्यार्थियों और शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संसाधनों से जोड़ेगा। वहीं कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि यह एमओयू विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा का ऐतिहासिक अध्याय है, जो शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण को नई दिशा देगा।
कार्यक्रम में एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. डॉ. गौतम सुत्रधार, सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलसचिव डॉ. नीत नयना, सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दोनों संस्थानों ने विश्वास जताया कि यह साझेदारी झारखंड समेत देशभर के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर खोलेगी।





