डीएम आशुतोष द्विवेदी की अनोखी पहल, तकनीकी कॉलेजों के प्रोफेसर स्वेच्छा से दे रहे प्रशिक्षण
प्रवीण कुमार, कटिहार। कटिहार के सरकारी और मॉडल स्कूलों के बच्चे अब स्कूल स्तर पर ही सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर कोडिंग की बारीकियां सीखेंगे। जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की अभिनव पहल के तहत छात्र-छात्राओं के लिए बिना किसी अतिरिक्त सरकारी खर्च के कोडिंग कक्षाओं की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों को कम उम्र से ही तकनीकी शिक्षा से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को बेहतर मंच देना है।
तकनीकी कॉलेजों के प्रोफेसर दे रहे प्रशिक्षण
इस पहल के तहत जिले के इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों के प्रोफेसर स्वेच्छा से विभिन्न स्कूलों में जाकर बच्चों को कंप्यूटर के माध्यम से कोडिंग सिखा रहे हैं। इसके लिए किसी अतिरिक्त सरकारी बजट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों की ओर से बच्चों को कोडिंग की शुरुआती जानकारी के साथ-साथ कंप्यूटर आधारित सीखने का व्यावहारिक अनुभव भी दिया जा रहा है।
कम उम्र में तकनीकी ज्ञान से प्रतिभा को मिलेगा बढ़ावा
स्कूली स्तर पर ही कोडिंग और तकनीकी शिक्षा से जुड़ने का बच्चों को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है। कम उम्र में कोडिंग का ज्ञान मिलने से विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मक सोच को विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे बच्चों में तकनीकी विषयों के प्रति रुचि भी बढ़ेगी और भविष्य में उन्हें कंप्यूटर एवं सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल सकेगा।
कोडिंग सीखने को लेकर बच्चों में उत्साह
कोडिंग कक्षाओं को लेकर स्कूली विद्यार्थियों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चे कंप्यूटर के माध्यम से कोडिंग सीखने और नई तकनीकों को समझने में रुचि दिखा रहे हैं। छात्र-छात्राओं में तकनीकी ज्ञान हासिल करने की ललक इस पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
नवाबगंज मॉडल स्कूल का डीएम ने किया निरीक्षण
इसी क्रम में जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल), नवाबगंज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोडिंग सीख रही छात्राओं से सीधे संवाद किया और उनके अनुभवों के बारे में जानकारी ली। डीएम ने कंप्यूटर लैब में चल रहे कोडिंग प्रशिक्षण का भी जायजा लिया और बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को करीब से देखा।
कटिहार प्रशासन की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में शुरू किया गया यह प्रयोग स्कूली बच्चों को तकनीकी दुनिया से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जिले के विद्यार्थियों को कम उम्र में ही आधुनिक तकनीक की समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा और भविष्य में उन्हें तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।





