कुरसेला (कटिहार)। जहां आस्था होती है, वहां मन को शांति मिलती है और जब श्रद्धा के साथ सेवा व परंपरा जुड़ जाए तो कोई स्थान धार्मिक धरोहर बन जाता है। कुरसेला प्रखंड के अयोध्यागंज बाजार स्थित करीब 100 वर्ष पुराना वैष्णवी दुर्गा मंदिर भी क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का ऐसा ही केंद्र है। शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से देर शाम तक पूजा-अर्चना, आरती और मां के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर और अयोध्यागंज बाजार भक्तिमय बना रहता है।
कुरसेला स्टेट के रघुवंश सिंह परिवार ने कराया था मंदिर का निर्माण
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब एक सदी पहले कुरसेला स्टेट के रघुवंश सिंह परिवार ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। समय के साथ यह मंदिर आसपास के गांवों के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। यहां पहुंचने वाले भक्तों की मान्यता है कि मां वैष्णवी दुर्गा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है।
मंदिर में मां दुर्गा के विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी सिंह पर विराजमान होकर भक्तों को भयमुक्त होने और कल्याण का आशीर्वाद देती हैं। यही वजह है कि नवरात्र के दिनों में दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
बलि की जगह शुरू हुई सात्विक पूजा, हलवा भोग की परंपरा
वैष्णवी दुर्गा मंदिर की पूजा परंपरा इसे खास पहचान देती है। मंदिर में किसी जीव की बलि नहीं दी जाती। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले यहां बलि की परंपरा थी, लेकिन समय के साथ ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों के सहयोग से इसे समाप्त कर दिया गया। इसके बाद मंदिर में सात्विक पूजा-पद्धति को प्रमुखता दी गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 1990 के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। इसी दौरान श्वेत संगमरमर से निर्मित मां की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद बलि की जगह मां को हलवा का भोग लगाने की परंपरा शुरू हुई। आज नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां को हलवा का भोग लगाते हैं और प्रसाद ग्रहण कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
नारियल चढ़ाने की अनूठी परंपरा
मंदिर में नारियल चढ़ाने की भी विशेष परंपरा है। श्रद्धालु मां के दरबार में नारियल अर्पित करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार नारियल चढ़ाकर मां से मनोकामना मांगी जाती है। श्रद्धालु नारियल का आधा हिस्सा मंदिर में अर्पित करते हैं, जबकि आधा हिस्सा प्रसाद के रूप में अपने साथ घर ले जाते हैं।
संध्या आरती में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
नवरात्र के दौरान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। शाम की आरती मंदिर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहती है। आरती के समय मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है और मां के जयकारों व घंटियों की गूंज से पूरा अयोध्यागंज बाजार भक्तिमय हो उठता है।
नवरात्र को लेकर मंदिर के आसपास भी विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है। श्रद्धालु पूजा सामग्री और प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचते हैं। वहीं, स्थानीय दुकानदारों के लिए भी नवरात्र का समय खास महत्व रखता है।
समिति के सदस्य संभाल रहे व्यवस्था
नवरात्र के दौरान मंदिर की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सार्वजनिक दुर्गा मंदिर समिति के कार्यकारिणी और सहयोगी सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजा-अर्चना और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर समिति के सदस्य लगातार जुटे हुए हैं।
समिति के सदस्यों के अनुसार नवरात्र में मां को विशेष रूप से नारियल चढ़ाया जाता है और हलवा का भोग लगाया जाता है। मंदिर की वर्षों पुरानी परंपराओं को कायम रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत का केंद्र
करीब एक सदी का इतिहास समेटे वैष्णवी दुर्गा मंदिर आज केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि कुरसेला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर से लेकर अयोध्यागंज बाजार तक मां के जयकारे गूंजते रहते हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि समय बदलने के बावजूद मंदिर की पुरानी परंपराएं और लोगों की आस्था आज भी कायम है। यही वजह है कि हर वर्ष नवरात्र के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है और वैष्णवी दुर्गा मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान को और मजबूत करता है।





