u कटिहार: भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आग उगलते सूरज, लू और बिजली कटौती ने कूलर-पंखे फेल कर दिये हैं। जिससे दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोग पसीना-पसीना होकर बीमार पड़ रहे हैं। पानी की किल्लत और कामकाजी लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बड़ा बाजार निवासी पंकज तम्बाखूवाला ने सुबह उठकर जैसे ही बाहर देखा,आसमान से आग बरस रही थी। जून की भीषण गर्मी में सूरज आग उगल रहा था। हवा में इतनी तपन थी कि घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। पंकज तम्बाखूवाला ने अपनी पत्नी से कहा, “इस बार तो गर्मी ने हद कर दी है, न बाहर चैन है और न घर के अंदर”।लोग गर्मी से इतने परेशान थे कि दिन भर कूलर और पंखे भी फेल हो रहे हैं। बिजली की अघोषित कटौती ने जीना दूभर कर दिया था। बाहर काम करने वाले मजदूर और किसान चिलचिलाती धूप में पसीना-पसीना हो रहे थे।
अघोषित बिजली कटौती के कारण लोगों का बुरा हाल है। खासकर रात में सो पाना मुश्किल हो गया है।गर्मी के कारण सिरदर्द,थकान,निर्जलीकरण और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
धूप के कारण दिन में काम करना मुश्किल है। रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।नदी-नाले सूखने की कगार पर हैं और पानी की कमी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।बचाव के उपाय:लोग घर से निकलते समय पूरे शरीर को ढक रहे हैं, ताकि तेज धूप से सुरक्षा हो सके। कुछ लोग दिन के बजाय सुबह-सुबह काम निपटाने की कोशिश कर रहे हैं।यह कहानी भीषण गर्मी के प्रकोप को दर्शाती है,जो न केवल इंसानों को बल्कि जानवरों को भी प्रभावित कर रही है।
जून के महीने में लोगों का जीना मुहाल हो गया है। गर्मी के कारण लोग पसीना-पसीना हो रहे हैं। ऊपर से बिजली की लगातार आंख मिचौनी और अघोषित कटौती अलग सितम ढा रही है। कुछ देर को भी लाइट चली जाए तो सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात में लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मई के महीने में कभी बारिश तो कभी बूंदाबांदी के बीच मौसम सुहावना लगने लगा था। लेकिन, महीना खत्म होते-होते गर्मी अपने पूरे रंग में नजर आने लगी थी। अब जून शुरू होने के बाद भी कोई राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। चिलचिलाती गर्मी के कारण रात हो या दिन पसीना नहीं सूख पा रहा है। मंगलवार को आसमान से बरसती आग के साथ ही धधकती सड़कों से निकलती गर्मी राहगीरों को दिन भर परेशान करती रही। वैसे तो सड़कों पर कम ही लोग नजर आ रहे थे। लेकिन, जितने भी थे वे अपने चेहरे को पूरी तरह ढंके हुए थे।
उधर, बाइक सवारों को गर्म हवा ने बहुत परेशान किया। सामने से पड़ते लू के थपेड़े उन्हें परेशान करते रहे। दुकानों पर बैठे दुकानदार भी पंखा चलने के बावजूद पसीना-पसीना नजर आ रहे थे। ऐसा ही हाल घरों में भी रहा। लोग कमरे के अंदर भी गर्मी से परेशान हैं। हालत यह है कि रात को लोगों की नींद भी ठीक से नहीं हो पा रही है।

