गोड्डा: 12वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर जिला उद्योग केंद्र, गोड्डा के सभागार में झारक्राफ्ट की ओर से विशेष शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हस्तकरघा उद्योग को बढ़ावा देना, बुनकरों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने को लेकर जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एकरारूल हसन, जिला योजना पदाधिकारी फैजान सरवर और झारक्राफ्ट के वरीय क्लस्टर प्रबंधक अब्दुल कादिर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि जिला योजना पदाधिकारी फैजान सरवर ने कहा कि हैंडलूम भारत की प्राचीन पहचान और समृद्ध परंपरा का हिस्सा है। आज भी बड़ी संख्या में लोग हथकरघा से बने कपड़ों को पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के दौर में महात्मा गांधी ने भी हथकरघा को बढ़ावा दिया था, जिसके कारण यह देश की पहचान से जुड़ गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बाजार में हथकरघा उत्पादों की मांग बढ़ रही है, लेकिन मांग के अनुरूप उत्पादन और उपलब्धता नहीं हो पा रही है। बाजार में हथकरघा से बने वस्त्रों की सीमित उपलब्धता के कारण उनकी कीमत भी बढ़ रही है, जिससे आम लोगों तक इन उत्पादों की पहुंच प्रभावित हो रही है।
जिला योजना पदाधिकारी ने कहा कि हथकरघा उद्योग से जुड़े कारीगरों के पलायन को रोकने के लिए इस रोजगार से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने और उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से झारक्राफ्ट का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से बुनकरों को एनएचडीपी, मुद्रा लोन, यार्न सप्लाई और झारक्राफ्ट के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बुनकरों से अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और हैंडलूम मार्क का उपयोग करने की अपील की।
झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य इकरारूल हसन आलम ने कहा कि हस्तकरघा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग बुनकरों के उत्थान और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम का संचालन झारक्राफ्ट गोड्डा के सीनियर क्लस्टर प्रबंधक अब्दुल कादिर ने किया। इस दौरान वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के डिजाइनर सत्येंद्र कुमार, मुख्यमंत्री लघु विकास बोर्ड के समन्वयक देवव्रत कुमार तथा बुनकर प्रतिनिधि मो. महफूजुद्दीन अंसारी, हुमायू अंसारी और जोसवा बेसरा सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में गोड्डा जिले के दर्जनों बुनकर और प्रतिनिधि मौजूद रहे। शिविर के माध्यम से बुनकरों को सरकारी योजनाओं, उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और बाजार से जुड़ने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कार्यक्रम में हस्तकरघा उद्योग को मजबूत करने और बुनकरों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया।




