कटिहार : कटिहार के शहरी क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर धार्मिक आस्था का सबसे बड़ा केंद्र हैं। यहां खासकर शारदीय नवरात्र के मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय व बाहर से आने जाने वाले भक्तों की भीड़ लगी रहती है। नवरात्र के दौरान अखंड पाठ व अखंड दीपक का जलता रहना इस मंदिर की विशेषता है।
मंदिर का इतिहास 150 वर्ष पुराना जब कटिहार को जिले का दर्जा नहीं मिला था। तब से इस मंदिर में पूजा पाठ की शुरुआत हुई थी, जो अब तक अनवरत जारी है। हालांकि मंदिर का इतिहास 150 वर्ष पुराना है। करीब पचीस करोड़ की लागत का लक्ष्य लिए मंदिर को विशाल एवं खूबसूरत बनाने का कार्य किया गया है। धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाने जाने वाला सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में नवरात्र के अष्टमी व नवमी तिथि को महिलाओं द्वारा खोइछा चढ़ाने की परंपरा रही है। जानकार लोगों का कहना है कि सैकड़ों वर्ष पहले यहां एक मठ हुआ करता था। जहां बाद में एक छोटे से मंदिर का निर्माण किया गया। स्व दिनानाथ मिश्रा ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी जमीन दान दिया था। बाद में उनके पुत्रों द्वारा भी मंदिर का रख रखाव,निर्माण कराया गया।
1980 में मां दुर्गा की प्रतिमा को किया गया था स्थापित साल 1980 में स्थानीय भक्तों, श्रद्धालुओं की मांग पर राजस्थान के मकराना से संगमरमर की बनी दुर्गा की प्रतिमा यहां स्थापित किया गया है। जिसके बाद अनवरत धार्मिक आस्था के केंद्र के रूप में इस मंदिर को जाना जाने लगा है। सामाजिक कार्यों के लिए निर्माण कराया गया।
दुर्गा मंदिर का करीब 25 करोड़ की लागत से निर्माण किया गया है।लेकिन भक्त श्रद्धालुओं के सहयोग से कोसी प्रमंडल का अनूठा मंदिर माना जाता है।इस मंदिर में बिहार बंगाल असम झारखंड राज्य से बड़ी संख्या में भक्त गण पुजा अर्चना करने आते हैं। यहां तक कि नेपाल से भी बड़ी संख्या में भक्त गण पुजा करने आते हैं।


