त्रिकोणी गांव के ऐतिहासिक पाता मेले में भोक्ताओं के पारंपरिक अनुष्ठान ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया

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लिट्टीपाड़ा प्रखंड के त्रिकोणी गांव में आयोजित ऐतिहासिक पाता मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना के साथ भोक्ताओं द्वारा किए गए पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान आकर्षण का केंद्र रहे। ऊंचे खंभे से लटककर की गई आराधना ने लोगों का ध्यान खींचा। मेले ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का अनूठा संदेश दिया।

 

लिट्टीपाड़ा। प्रखंड की बाड़ू पंचायत अंतर्गत त्रिकोणी गांव में शनिवार को ऐतिहासिक और पारंपरिक पाता मेले का भव्य आयोजन किया गया। हर वर्ष आयोजित होने वाला यह मेला इस बार भी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक समरसता का केंद्र बना रहा। सुबह से ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा क्षेत्र भगवान शिव और माता पार्वती के जयकारों से गूंजता रहा, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
पाता मेले का मुख्य आकर्षण भोक्ताओं द्वारा किया गया पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान रहा। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ भगवान शिव एवं माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और लोगों के कल्याण की कामना की गई। कई भोक्ताओं ने इस अनुष्ठान में शामिल होने से पूर्व कई दिनों तक कठिन व्रत और उपवास रखा था, जिसके बाद उन्होंने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए विशेष पूजा संपन्न की।
मेले के दौरान सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र वह क्षण बना, जब पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भोक्ताओं को ऊंचे खंभे के सहारे बांधकर हवा में गोल-गोल घुमाया गया। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते नजर आए। खंभे के शीर्ष से लटककर किए गए इस अनूठे धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे थे। महिला, पुरुष और बच्चों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को देखा और अपनी आस्था व्यक्त की।
पाता मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का भी प्रतीक बनकर उभरा। मेले में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, लोक संस्कृति की झलक और ग्रामीण परिवेश की विशेषता देखने को मिली। विभिन्न प्रकार की दुकानों और मनोरंजन के साधनों ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मेले का आनंद लिया।
ग्रामीणों का कहना है कि पाता मेला सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जो आज भी लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े हुए है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। ग्रामीणों ने इस परंपरा को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
मेले के सफल आयोजन के लिए स्थानीय समिति और पंचायत प्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए थे। आयोजन में मुखिया संतोषीला मरांडी, प्रेम हांसदा, मनवेल किस्कू, चुंडा किस्कू, अशोक ठाकुर, स्टीफन मरांडी, अर्जुन मड़ैया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

rohini shree
Author: rohini shree

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